राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: SIT जांच में बड़ा खुलासा, 42 दिनों में 70 बार चोरी का आरोप
अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में SIT की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच यानी 42 दिनों में लगभग 70 बार चोरी होने की बात सामने आई है। इस मामले में कुल 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और सभी आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही रकम और दान पेटियों के रिकॉर्ड का मिलान किया। शुरुआती जांच में 500 रुपये की गड्डियों में लगातार कमी देखी गई, जिसके बाद संदेह गहराया।
हिडन कैमरे से हुआ खुलासा
शक बढ़ने पर नोट गिनने वाले कमरे में हिडन कैमरे लगाए गए। फुटेज में कथित तौर पर यह सामने आया कि कर्मचारी नोट गिनने के दौरान गिनती की प्रक्रिया का फायदा उठाकर नोटों की गड्डियों से पैसे निकालकर छिपा लेते थे। कई बार कर्मचारी सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े होकर असल गतिविधियों को छिपाने की कोशिश करते थे, लेकिन हिडन कैमरों ने पूरी गतिविधि रिकॉर्ड कर ली।
चोरी का दूसरा तरीका भी सामने आया
जांच में यह भी सामने आया कि नोटों की गड्डियों में अतिरिक्त नोट जोड़ दिए जाते थे। बाद में बैंक में जमा के समय इन अतिरिक्त नोटों को निकाल लिया जाता था। इस तरह वाउचर और वास्तविक रकम में अंतर पैदा किया जाता था, जिससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी नहीं दिखती थी। सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में अनुकल्प मिश्रा और उनके रिश्तेदार लवकुश मिश्रा की भूमिका भी सामने आई है। लवकुश मिश्रा के घर से लगभग 10 लाख रुपये बरामद किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
सिस्टम में मिली लापरवाही का फायदा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नोट गिनने वाले कई कर्मचारी आपस में परिचित या सिफारिश पर नियुक्त किए गए थे। ड्यूटी खत्म होने के बाद उनकी तलाशी नहीं ली जाती थी, जिसका फायदा उठाकर कथित रूप से लंबे समय तक चोरी की जाती रही। जांच में अविनाश पांडे नाम के कर्मचारी की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है, जिसमें कथित रूप से वह रकम निकालते हुए दिखाई दे रहा है। इसके बैंक लेन-देन का मिलान करने पर कुछ जमा राशि से भी संबंध पाया गया है।
जेवरात चोरी के भी आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि दान में मिले सोने-चांदी के जेवरात जैसे बाली, झुमकी, नथ और अन्य आभूषणों की भी कथित रूप से चोरी की गई। कई मामलों में रिकॉर्ड बाद में तैयार किया जाता था, जबकि वस्तुएं पहले ही गायब हो चुकी होती थीं।