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पंकज चौधरी बने उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष, पीयूष गोयल ने किया औपचारिक ऐलान

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के लोकसभा सांसद पंकज चौधरी को रविवार को निर्विरोध रूप से यूपी भाजपा का अध्यक्ष चुना गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में उनके नाम की औपचारिक घोषणा की। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।पंकज चौधरी ने शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र नामांकन दाखिल किया था। उनके प्रस्तावकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री और कई अन्य बड़े नेता शामिल थे। किसी अन्य उम्मीदवार के नामांकन न दाखिल करने के कारण उनका निर्विरोध चयन हुआ।  नए अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने कहा, “पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। कोई पद छोटा या बड़ा नहीं होता, जो दायित्व मिलता है, उसे कार्यकर्ता के रूप में निभाते हैं।
“गोरखपुर बना यूपी भाजपा का पावर सेंटर
पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने से पूर्वांचल खासकर गोरखपुर क्षेत्र का भाजपा संगठन में दबदबा और मजबूत हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गोरखपुर से हैं और अब प्रदेश अध्यक्ष भी इसी क्षेत्र से हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे पूर्वांचल में पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले कुर्मी वोट बैंक पर फोकस
पंकज चौधरी ओबीसी की कुर्मी जाति से ताल्लुक रखते हैं। उत्तर प्रदेश में कुर्मी समुदाय की आबादी करीब 8 प्रतिशत है और यह करीब 50 विधानसभा सीटों पर जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती है। 2024 लोकसभा चुनाव में कुर्मी वोटरों का एक हिस्सा भाजपा से दूर हुआ था। पार्टी अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति के तहत कुर्मी चेहरे को संगठन की कमान सौंपी है।पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर निगम पार्षद से शुरू होकर सात बार सांसद और केंद्रीय मंत्री तक पहुंचा है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी नियुक्ति को पार्टी की जातीय संतुलन और संगठन मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।भाजपा के इस फैसले से यूपी में विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को चुनौती देने की तैयारी साफ नजर आ रही है।

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