मध्य प्रदेश विधानसभा में UCC बिल पास, बहुविवाह पर रोक और विवाह-तलाक का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक पारित कर दिया। विधेयक में बहुविवाह पर रोक, सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेजने की मांग की, लेकिन शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने इसे पारित घोषित कर दिया।
हंगामे के बीच दो बार स्थगित हुई कार्यवाही
विधानसभा में यूसीसी विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस विधायकों ने सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी की और बिल को प्रवर समिति को भेजने की मांग की। हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पहले 10 मिनट और बाद में 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर अध्यक्ष ने विधेयक को पारित घोषित कर दिया।
बिल के प्रमुख प्रावधान
यूसीसी विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं—
- बहुविवाह पर प्रतिबंध।
- सभी धर्मों (अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर) के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य।
- तीन तलाक और निकाह हलाला को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान।
- लिव-इन रिलेशनशिप का एक महीने के भीतर पंजीकरण अनिवार्य, उल्लंघन पर तीन महीने तक की सजा का प्रावधान।
- जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी और सहायक प्रजनन तकनीक (ART) से जन्मे बच्चों को समान कानूनी और उत्तराधिकार अधिकार।
- लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैधानिक दर्जा।
- यदि लिव-इन संबंध में पुरुष साथी महिला को छोड़ देता है, तो महिला अदालत में भरण-पोषण की मांग कर सकेगी।
अनुसूचित जनजातियां रहेंगी बाहर
विधेयक में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि जनजातीय समुदायों की परंपराओं और विशेष अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यह प्रावधान किया गया है।
सीएम मोहन यादव ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूसीसी विधेयक पारित होने को राज्य के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और बहुविवाह जैसी प्रथाओं से उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम संविधान की समानता की भावना को आगे बढ़ाने वाला है और प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
कांग्रेस का विरोध जारी
कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने कहा कि प्रदेश में पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सरकार सांप्रदायिक और राजनीतिक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।
वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि विधेयक को असंवैधानिक तरीके से पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि वह इस कानून को अदालत में चुनौती देंगे और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।