तीस हजारी कोर्ट में जज के सामने वकील पर हमला: CJI सूर्यकांत ने जताई नाराजगी, कहा- ‘गुंडा राज’ बर्दाश्त नहीं, न्याय तंत्र के लिए खतरे की घंटी
नई दिल्ली: दिल्ली की तीस हजारी जिला अदालत में कोर्ट रूम के अंदर एक वकील पर मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के दौरान जज अदालत में मौजूद थे, लेकिन फिर भी दूसरे पक्ष के वकील और कुछ लोगों ने आरोपी की ओर से पेश हो रहे वकील पर हमला कर दिया। पीड़ित वकील ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया, जहां मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इसकी कड़ी निंदा की और इसे न्याय व्यवस्था के लिए ‘खतरे की घंटी’ करार दिया।
घटना का विवरण
पीड़ित वकील ने CJI की बेंच के सामने बताया कि 7 फरवरी 2026 को वे एक आरोपी की ओर से अतिरिक्त जिला जज हरजीत सिंह पाल की अदालत में पेश हो रहे थे। तभी शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने कई लोगों (‘गुंडों’) के साथ जबरन कोर्ट रूम में घुसकर उन पर हमला कर दिया। हमला कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान हुआ और जज सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कोई मदद नहीं की और घटना को रोकने का प्रयास नहीं किया।
पीड़ित वकील ने CJI की बेंच के सामने बताया कि 7 फरवरी 2026 को वे एक आरोपी की ओर से अतिरिक्त जिला जज हरजीत सिंह पाल की अदालत में पेश हो रहे थे। तभी शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने कई लोगों (‘गुंडों’) के साथ जबरन कोर्ट रूम में घुसकर उन पर हमला कर दिया। हमला कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान हुआ और जज सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कोई मदद नहीं की और घटना को रोकने का प्रयास नहीं किया।
CJI की सख्त टिप्पणी
मामले की मेंशनिंग के दौरान CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह ‘गुंडा राज’ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जब कोर्ट रूम के अंदर ही वकील सुरक्षित नहीं हैं, तो यह पूरे न्याय तंत्र के लिए खतरे की घंटी है।” उन्होंने इसे कानून के राज की सीधी नाकामी बताया और कहा कि अदालत परिसर में हिंसा होना बेहद गंभीर है। CJI ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया।
मामले की मेंशनिंग के दौरान CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह ‘गुंडा राज’ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जब कोर्ट रूम के अंदर ही वकील सुरक्षित नहीं हैं, तो यह पूरे न्याय तंत्र के लिए खतरे की घंटी है।” उन्होंने इसे कानून के राज की सीधी नाकामी बताया और कहा कि अदालत परिसर में हिंसा होना बेहद गंभीर है। CJI ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया।
CJI ने क्या निर्देश दिए?
CJI ने वकील को सलाह दी कि वे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखित शिकायत दें और उसकी एक प्रति सुप्रीम कोर्ट को भी भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामला प्रशासनिक स्तर पर देखा जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।यह घटना न्याय व्यवस्था में अनुशासन और सुरक्षा की कमी को उजागर करती है। तीस हजारी कोर्ट में पहले भी वकीलों और क्लाइंट्स के बीच झड़पें हो चुकी हैं, लेकिन कोर्ट रूम के अंदर जज के सामने हमला होना चिंताजनक है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन की उम्मीद है।
CJI ने वकील को सलाह दी कि वे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखित शिकायत दें और उसकी एक प्रति सुप्रीम कोर्ट को भी भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामला प्रशासनिक स्तर पर देखा जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।यह घटना न्याय व्यवस्था में अनुशासन और सुरक्षा की कमी को उजागर करती है। तीस हजारी कोर्ट में पहले भी वकीलों और क्लाइंट्स के बीच झड़पें हो चुकी हैं, लेकिन कोर्ट रूम के अंदर जज के सामने हमला होना चिंताजनक है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन की उम्मीद है।