सिर्फ सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, गले और सिर के कैंसर से भी बचाव कर सकती है HPV वैक्सीन: विशेषज्ञ
नई दिल्ली: जब भी HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन की बात होती है, ज्यादातर लोग इसे केवल सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन सिर और गर्दन के कुछ प्रकार के कैंसर, विशेषकर गले के पिछले हिस्से, टॉन्सिल और जीभ के आधार में होने वाले कैंसर के खतरे को भी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्या है HPV और कैसे फैलता है?
ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) एक सामान्य वायरस है, जो मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। अधिकांश मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इस वायरस को समाप्त कर देती है, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है। ऐसे मामलों में HPV भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
सिर और गर्दन के कैंसर में मुंह, गला, वॉइस बॉक्स (लैरिंक्स), नाक की गुहा, साइनस और लार ग्रंथियों से जुड़े कैंसर शामिल हैं। इनमें मुंह और गले के कैंसर सबसे अधिक पाए जाते हैं।
पारंपरिक रूप से तंबाकू और शराब को इन कैंसरों के प्रमुख जोखिम कारक माना जाता रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में गले के कुछ कैंसरों के बढ़ते मामलों के पीछे HPV संक्रमण भी एक महत्वपूर्ण वजह बनकर उभरा है।
विशेष रूप से ओरोफैरिंजियल कैंसर (गले के पिछले हिस्से का कैंसर) के कई मामलों में HPV संक्रमण की भूमिका पाई गई है। विकसित देशों में इस प्रकार के कैंसर के बड़ी संख्या में मामलों को HPV से जुड़ा माना जाता है।
HPV और कैंसर का संबंध
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, HPV केवल सर्वाइकल कैंसर ही नहीं बल्कि कई अन्य प्रकार के कैंसरों से भी जुड़ा हुआ है। इनमें शामिल हैं:
- ओरोफैरिंजियल (गले के पिछले हिस्से का कैंसर)
- टॉन्सिल कैंसर
- जीभ के आधार का कैंसर
- लैरिंक्स (वॉइस बॉक्स) कैंसर
- ओरल कैविटी (मुंह) का कैंसर
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि सिर और गर्दन के कैंसर के एक महत्वपूर्ण हिस्से में HPV संक्रमण मौजूद होता है।
HPV वैक्सीन कैसे करती है सुरक्षा?
HPV वैक्सीन शरीर को वायरस के उन प्रकारों से बचाने के लिए विकसित की गई है जो कैंसर का सबसे अधिक खतरा पैदा करते हैं। संक्रमण होने से पहले वैक्सीन लगने पर शरीर वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित कर लेता है, जिससे HPV से जुड़े कैंसरों का जोखिम कम हो सकता है।
विशेषज्ञ 11 से 12 वर्ष की आयु में लड़कों और लड़कियों दोनों को HPV वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं। जिन लोगों को निर्धारित उम्र में वैक्सीन नहीं लग पाई हो, वे चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बाद में भी टीकाकरण करवा सकते हैं।
बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि HPV वैक्सीन कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही तंबाकू से दूरी, शराब का सीमित सेवन, सुरक्षित जीवनशैली और नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी हैं।
जागरूकता और समय पर टीकाकरण न केवल सर्वाइकल कैंसर बल्कि HPV से जुड़े कई अन्य कैंसरों के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में रोकथाम और समय पर सुरक्षा सबसे प्रभावी हथियार हैं।