• June 24, 2026

दिल्ली में मॉनसून से पहले अलर्ट, 24×7 कंट्रोल रूम और हाई-लेवल मॉनिटरिंग शुरू

दिल्ली में इस साल मॉनसून के 25 से 30 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई गई है। संभावित भारी बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल ‘एपेक्स कमेटी’ गठित की गई है, जो पूरे बाढ़ प्रबंधन तंत्र की निगरानी करेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2023 जैसी बाढ़ की स्थिति दोबारा न बने, जब यमुना किनारे कई इलाके जलमग्न हो गए थे।

24×7 फ्लड कंट्रोल रूम होगा सक्रिय

15 जून से 15 अक्टूबर तक दिल्ली में 24×7 सेंट्रल फ्लड कंट्रोल रूम काम करेगा, जो पूरे शहर में जलभराव और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखेगा। यह कंट्रोल रूम रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिए तुरंत अलर्ट और कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

13 जिलों में राहत और निगरानी व्यवस्था

दिल्ली के सभी 13 जिलों में सेक्टर-स्तरीय कमेटियां, कंट्रोल रूम और राहत शिविर बनाए गए हैं। इसके साथ ही यमुना नदी और नजफगढ़ नाले के लिए थ्री-टियर वॉर्निंग सिस्टम लागू किया गया है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय रहते चेतावनी दी जा सके।

संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर

सरकार ने 20 से अधिक संवेदनशील तटबंधों और पंपिंग स्टेशनों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। अतीत में जलभराव से प्रभावित रहे क्षेत्रों को प्राथमिकता पर रखा गया है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

MCD, PWD और जल बोर्ड को निर्देश

दिल्ली नगर निगम (MCD), PWD, DDA और दिल्ली जल बोर्ड को नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर सेना और अतिरिक्त संसाधनों की मदद लेने की भी योजना बनाई गई है।

2023 की बाढ़ से मिली सीख

सरकार ने 2023 की बाढ़ को इस साल की तैयारी का आधार माना है, जब भारी बारिश और ऊपरी इलाकों से पानी छोड़े जाने के कारण सिविल लाइंस, आईटीओ, कश्मीरी गेट और यमुना बाजार जैसे इलाके जलमग्न हो गए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई अत्यधिक बारिश और हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए बड़े पानी के कारण दिल्ली में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी।

लक्ष्य: जलभराव और नुकसान को रोकना

इस साल सरकार का फोकस तेज प्रतिक्रिया प्रणाली, बेहतर निगरानी और त्वरित राहत व्यवस्था पर है, ताकि मॉनसून के दौरान आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े और शहर को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।

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