‘भारत’ और उसके सत्व या गुण-धर्म रूप ‘भारतीयता’ के स्वभाव को समझने की चेष्टा यथातथ्य वर्णन के साथ ही वांछित या आदर्श स्थिति का निरूपण भी हो जाती है। भारतीयता एक मनोदशा भी है। उसे समझने के लिए हमें भारतीय मानस को समझना होगा । यह सिर्फ ज्ञान का ही नहीं बल्कि भावना का भी प्रश्न है और इसमें जड़ों की भी तलाश सम्मिलित है। आज इस उपक्रम के लिए कई विचार-दृष्टियां उपलब्ध हैं जिनमें […]Read More
देश, ‘संदेशखाली’ से सकते में है। दुख है कि संविधान की सबसे ज्यादा दुहाई देनेवाली ममता बनर्जी के राज में यह हालत हैं कि एक नहीं आज कई ”संदेशखाली” पैदा हो गए हैं, जहां महिलाओं की इज्जत तार-तार हो रही है। हिंसा का तांडव कहीं भी हो सकता है और तुष्टीकरण की राजनीति के चलते बहुसंख्यक हिन्दू समाज कभी भी मौत के घाट उतार दिया जाता है। लव जिहाद, लैंड जिहाद और विदेशी घुसपैठ तो […]Read More
शब्दों की भीड़। दशों दिशाओं से हमारी ओर आते गतिशील शब्द। पूरब से आते शब्द पश्चिम से आते शब्दों से टकराते हैं, मिलते हैं। इसी तरह उत्तर दक्षिण सहित सभी दिशाओं से भी। भारतीय चिन्तन में आकाश का गुण शब्द कहा गया है। शब्द ध्वनि ऊर्जा हैं। शब्द पहले अरूप थे। लिपि नहीं थी। सिर्फ बोले सुने जाते थे। वे संवेदन प्रकट करने का माध्यम थे। फिर हर्ष, विषाद, क्रोध और बोध आदि भाव प्रकट […]Read More
अभी केवल सात वर्ष ही हुए हैं। बीमार उत्तर प्रदेश अब विकसित उत्तर प्रदेश के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय ब्रॉन्ड बन कर उभर रहा है। ब्रॉन्ड योगी जैसे सात्विक और सतत क्रियाशील नेतृत्व ने इस अति पिछड़े और माफियाओं की जकड़ में घुट रहे प्रदेश को आज ब्रॉन्ड यूपी बनाकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित किया है। विश्व की औद्योगिक, वाणिज्यिक और व्यापारिक संस्थाएं उत्तर प्रदेश को अपना कार्यक्षेत्र बना रही हैं। लाखों लोगों को […]Read More
उन्नीसवीं सदी में धार्मिक क्षेत्र में श्री रामकृष्ण परमहंस सबसे ऊंचे स्थान पर विराजमान थे। वह एक रहस्यमयी और महान योगी पुरुष थे जिन्होंने काफी सरल शब्दों में अध्यात्मिक बातों को सामान्य लोगों के सामने रखा। जिस समय हिन्दू धर्म बड़े संकट में फंसा हुआ था उस समय श्री रामकृष्ण परमहंस ने हिन्दू धर्म में नयी उम्मीद जगाई। श्रीरामकृष्ण परमहंस के पास में अद्भुत शक्तियां थीं। कहा जाता है कि श्री रामकृष्ण परमहंस भगवान विष्णु […]Read More






