अंग्रेजी नव वर्ष के बढ़ते प्रभाव के बीच राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भारतीय नागरिकों को सचेत करते हुए लिखते हैं कि ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं, है अपनी ये तो रीत नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं। इन पंक्तियों का आशय पूरी तरह से स्पष्ट था कि अंग्रेजी नव वर्ष हमारा अपना नहीं, बल्कि अंग्रेजों द्वारा भारतीयता को मिटाने के लिए भारत पर थोपा गया था। विसंगति यह है […]Read More
कर्नाटक की जनता कई ज्वलंत समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन कोई भी चुनाव लड़ने वाली पार्टी या उनके प्रतिनिधि इस चिंताजनक स्थिति से चिंतित दिखाई नहीं दे रहे हैं। फिलहाल की सरकार अखबारी, इलेक्ट्रानिक और वेब विज्ञापन के माध्यम से यही बताने का प्रयास करने में जुटी दिखाई देती है कि सब कुछ ठीक है। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर स्थिति काफी विरोधाभासी और चिंताजनक है। इससे अधिक स्थिति क्या खराब होगी कि भारत में […]Read More
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 पर की गई टिप्पणी के बाद लगता है कि कांग्रेस इस विषय को लेकर सदैव विवाद की स्थिति बनाए रखना चाहती है। जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाना वैध माना है, तब बार-बार इसे लेकर कांग्रेस क्यों बचकाने बयान दे रही […]Read More
लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सभी राजनीतिक दल अपने अस्तित्व को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बयानबाजी कर रहे हैं। इतना ही नहीं विपक्षी राजनीतिक दल केवल वर्तमान सत्ताधारी दल के विरोध पर ही अपना पूरा फोकस करते हुए चुनावी मैदान में हैं। बड़ी बात यह कि भाजपा ने जहां मोदी की गारंटी को प्रमुख हथियार बनाया है, वहीं अब कांग्रेस भी इसका अनुसरण करने की नीति अपना रही है। भाजपा की ओर से […]Read More
अभी कुछ ही दिन पहले यूएन में ‘इस्लामोफोबिया’ पर प्रस्ताव लाया गया है। जिसमें पूरी दुनिया से यह कहा गया कि ‘इस्लाम से नफरत’ करने वालों पर अपने देशों में सख्त कदम उठाएं। कहा जा रहा था कि इस्लाम का आतंकवाद से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं । इस्लाम तो शांति का मजहब है, वह तो आपसी प्रेम और भाईचारे में विश्वास रखता है और अब इनका ये प्रेम देखिए कि जिसे ये रमजान का […]Read More






