अंग्रेज़ी उपनिवेश के अंधे युग से मुक्ति के बाद भारत ने एक आधुनिक लोकतंत्र के रूप में अब तक तीन चौथाई सदी की यात्रा पूरी कर ली है। इस बीच यहाँ की राजनैतिक प्रतिबद्धताओँ में उतार-चढ़ाव के कई दौर आए, कई आंतरिक और बाह्य आपदाएँ भी आईं फिर भी संसदीय लोकतंत्र की रक्षा करने में देश सफल रहा। इस बीच नेतृत्व में भागीदारी भी इस अर्थ में विकेंद्रित हुई कि वह अभिजात वर्ग के एकल […]Read More
14 अप्रैल 1891 को महू (मध्यप्रदेश) छावनी में पिता सूबेदार रामजी सकपाल एवं माता भीमाबाई के परिवार में बाबा साहेब का जन्म हुआ था। कुशाग्र बुद्धि,अथकपरिश्रमी, शिक्षाविद, शोषित, वंचित, पीड़ितों के प्रति संघर्ष के कारण मसीहा के रूप में उनको पहचान मिली। आर्थिक विशेषज्ञ, श्रमिक नेता के साथ-साथ राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत बाबा साहेब का जीवन था।सामाजिक समता एवं सामाजिक न्याय के प्रति जीवन पर्यंत संघर्ष करने वाले समाज उद्धारक बाबा साहेब थे।संविधान के निर्माण […]Read More
हर वर्ष 14 अप्रैल को बाबासाहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जयन्ती मनायी जाती है। बाबासाहेब की जयन्ती पर लोगों को संकल्प लेना चाहिये कि हम सब सच्चे मन से उनके बताए मार्ग का अनुसरण करेंगे। उनके बनाए संविधान का पालन करेंगे। ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे देश के किसी कानून का उल्लंघन होता हो। चूंकि बाबासाहेब हमेशा जाति प्रथा, ऊंच नीच की बातों के विरोधी थे। इसलिये उनकी जयन्ती पर श्रद्धांजलि देने का सबसे […]Read More
जलियांवाला बाग नरसंहार को 13 अप्रैल को एक सौ चार वर्ष हो जाएंगे । 13 अप्रैल 1919 को जनरल डायर ने वैशाख उत्सव के लिए एकत्रित भीड़ और सैकड़ों निर्दोष नागरिकों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया था । इसमें तीन सौ से अधिक लोगों का बलिदान हुआ और डेढ़ हजार से अधिक लोग घायल हुए थे । इनमें से भी अनेक लोगों ने बाद में प्राण त्यागे । ये सब संख्या जोड़े तो मरने […]Read More
भारतीय समाज में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है, जो आदि शक्ति दुर्गा की पूजा का पावन पर्व है। नवरात्रि के नौ दिन देवी दुर्गा के विभिन्न नौ स्वरूपों की उपासना के लिए निर्धारित हैं और इसीलिए नवरात्रि को नौ शक्तियों के मिलन का पर्व भी कहा जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है और इस बार नवरात्रि पर्व की शुरुआत 09 अप्रैल से हो चुकी […]Read More






