देश में लोकसभा चुनाव प्रचार में राजनीतिक दलों में बयानों की आंधी सी चल रही हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने आपको आम जनता का हितैषी सिद्ध करने का प्रचार कर रहे हैं। इन बयानों में कहीं-कहीं राजनीति की मर्यादा का भी उल्लंघन भी होता दिख रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान सभी दल अपने-अपने हिसाब से ढोल पीटकर जनता को अपने पाले में लाने की कवायद कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के बयान […]Read More
अंग्रेज़ी उपनिवेश के अंधे युग से मुक्ति के बाद भारत ने एक आधुनिक लोकतंत्र के रूप में अब तक तीन चौथाई सदी की यात्रा पूरी कर ली है। इस बीच यहाँ की राजनैतिक प्रतिबद्धताओँ में उतार-चढ़ाव के कई दौर आए, कई आंतरिक और बाह्य आपदाएँ भी आईं फिर भी संसदीय लोकतंत्र की रक्षा करने में देश सफल रहा। इस बीच नेतृत्व में भागीदारी भी इस अर्थ में विकेंद्रित हुई कि वह अभिजात वर्ग के एकल […]Read More
14 अप्रैल 1891 को महू (मध्यप्रदेश) छावनी में पिता सूबेदार रामजी सकपाल एवं माता भीमाबाई के परिवार में बाबा साहेब का जन्म हुआ था। कुशाग्र बुद्धि,अथकपरिश्रमी, शिक्षाविद, शोषित, वंचित, पीड़ितों के प्रति संघर्ष के कारण मसीहा के रूप में उनको पहचान मिली। आर्थिक विशेषज्ञ, श्रमिक नेता के साथ-साथ राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत बाबा साहेब का जीवन था।सामाजिक समता एवं सामाजिक न्याय के प्रति जीवन पर्यंत संघर्ष करने वाले समाज उद्धारक बाबा साहेब थे।संविधान के निर्माण […]Read More
हर वर्ष 14 अप्रैल को बाबासाहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जयन्ती मनायी जाती है। बाबासाहेब की जयन्ती पर लोगों को संकल्प लेना चाहिये कि हम सब सच्चे मन से उनके बताए मार्ग का अनुसरण करेंगे। उनके बनाए संविधान का पालन करेंगे। ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे देश के किसी कानून का उल्लंघन होता हो। चूंकि बाबासाहेब हमेशा जाति प्रथा, ऊंच नीच की बातों के विरोधी थे। इसलिये उनकी जयन्ती पर श्रद्धांजलि देने का सबसे […]Read More
जलियांवाला बाग नरसंहार को 13 अप्रैल को एक सौ चार वर्ष हो जाएंगे । 13 अप्रैल 1919 को जनरल डायर ने वैशाख उत्सव के लिए एकत्रित भीड़ और सैकड़ों निर्दोष नागरिकों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया था । इसमें तीन सौ से अधिक लोगों का बलिदान हुआ और डेढ़ हजार से अधिक लोग घायल हुए थे । इनमें से भी अनेक लोगों ने बाद में प्राण त्यागे । ये सब संख्या जोड़े तो मरने […]Read More






