1931 में आई फिल्म ‘आलमआरा’ के द्वारा भारत में बोलती फिल्मों का युग शुरू हुआ । मूक फिल्मों में कलाकारों का खूबसूरत होना ही काफी था, लेकिन अब खूबसूरती के साथ-साथ उसकी आवाज भी महत्वपूर्ण हो गई। इसका विपरीत असर फिल्मोद्योग के अनपढ़ एवं ऐंग्लो-इंडियन कलाकारों पर पड़ा। जयराज भी इस आंधी से बच नहीं सके। वे शारदा फिल्म कंपनी में थे और कंपनी ने ‘सस्सी-पुन्नू’ फिल्म के जरिए सवाक् फिल्म-निर्माण के क्षेत्र में कदम […]Read More
स्व के आलोक में तप, त्याग और तितिक्षा जैसे गौरवशाली भारतीय मूल्यों को मिट्टी में गूंथकर यदि एक हिंदुत्व की मूर्ति गढ़ी जाए, तो उस मूर्ति का नाम होगा ‘वीर विनायक दामोदर सावरकर परंतु वीर सावरकर का नाम आते ही रंगे सियारों और लाल श्वानों में दहशत का वातावरण निर्मित हो जाता है और हृदय की धड़कन तेज हो जाती हैं। कतिपय लोगों की तो हृदय गति ही रुकने लगती है। प्रकारांतर से वीर सावरकर […]Read More
मध्य प्रदेश में नई सरकार के गठन और उसके बाद प्रदेश को मुखिया के रूप में मिले डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री के पद पर रहते अभी पूरे छह माह भी नहीं बीते हैं कि एक के बाद एक उनके निर्णयों ने हर क्षेत्र में राज्य की गति को ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया है। यह स्वभाविक है कि किसी भी राज्य के विकास में सबसे अहम भूमिका, शासन, प्रशासन और जनता के बीच के समन्वय […]Read More
”आशा सेतु” महज एक किताब नहीं है। इसमें जीवन के विविध पक्षों का समावेश है। इस किताब का प्रकाशन पैरोकार प्रकाशन ने किया है। इसका लोकार्पण जयपुर में राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सभागार में समारोहपूर्वक किया गया। समारोह का आयोजन वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकारों की सक्रिय साझेदारी के बीच हुआ। पुस्तक का संपादन डॉ. कृष्ण कल्कि ने किया है। आशा सेतु पुस्तक प्रखर पत्रकार, लोकसेविका, वाणिज्य सेतु एवं गरीबों का सेतु की संपादक आशा […]Read More
हिमाचल प्रदेश के चुनाव तक पहुंचते-पहुंचते रैलियों और महारैलियों का दौर अपने चरम पर है । मुश्किल से सप्ताह भर का समय शेष है । राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, संविधान, कानून व्यवस्था, जाति और क्षेत्रीय समीकरण आदि महत्वपूर्ण विषय रहे हैं जिन का जिक्र दलों ने अपने-अपने हिसाब से परिस्थिति के अनुसार किया है अथवा कर रहे हैं । कौन कितना सफल रहा है यह परिणाम तय करेंगे । लोकसभा चुनाव […]Read More






