बिहार के भगवा स्कूलों पर बढ़ा सियासी विवाद, शिक्षा मंत्री बोले- ‘सरस्वती माता का रंग भी भगवा है’
पटना: बिहार के सभी 551 मॉडल स्कूलों को केसरिया (भगवा) रंग में रंगने के सरकार के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। इस बीच बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सरकार के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि “सरस्वती माता का रंग भी भगवा है, इसलिए स्कूलों को भगवा रंग दिया गया है।”
शिक्षा मंत्री ने फैसले का किया बचाव
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि स्कूलों का नाम ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ रखा गया है और उसी भावना के अनुरूप स्कूलों को केसरिया रंग दिया गया है। उनका कहना है कि यह फैसला किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर लिया गया है।
विपक्ष और जेडीयू ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने इसे शिक्षा के भगवाकरण की शुरुआत बताते हुए आलोचना की है। वहीं, जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि स्कूलों का रंग बदलने से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का ध्यान बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने पर होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने स्कूलों के लिए भूमि दान की थी, उनके सम्मान का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
क्या बदला है स्कूलों में?
शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के अनुसार—
- सभी मॉडल स्कूलों की बाहरी दीवारें केसरिया रंग से रंगी जाएंगी।
- कक्षाओं की अंदरूनी दीवारें सफेद होंगी।
- मुख्य प्रवेश द्वार को हल्के पीले या गोल्डन रंग में रंगा जाएगा।
इससे पहले स्कूलों के रंग का चयन स्थानीय स्तर पर किया जाता था और अधिकांश स्कूल गुलाबी, पीले या आसमानी रंग में रंगे हुए थे।
नाम बदलने पर भी विवाद
सरकार ने राज्य के मॉडल स्कूलों का नाम बदलकर ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ कर दिया है। इस फैसले पर भी राजनीतिक बहस जारी है। कुछ स्थानों पर उन परिवारों ने भी नाराजगी जताई है, जिन्होंने स्कूलों के लिए जमीन दान की थी और जिनके नाम पर पहले स्कूलों की पहचान थी।
हालांकि, सरकार का कहना है कि दानदाताओं के नाम हटाए नहीं गए हैं, बल्कि उनके नाम के साथ ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ जोड़ा गया है।
बेगूसराय से हुई थी योजना की शुरुआत
राज्य सरकार ने कक्षा 9 से 12 तक संचालित 551 मॉडल स्कूलों का नाम बदलने की पहल का औपचारिक शुभारंभ बेगूसराय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी हिस्सा लिया था। इसके बाद से ही स्कूलों के नाम और रंग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।