केरल में बड़ा फैसला: CM वीडी सतीशन ने रद्द की सिल्वरलाइन परियोजना, विरोधियों पर दर्ज केस वापस लेने की तैयारी
केरल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। हाल ही में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन की जीत के बाद मुख्यमंत्री बने V. D. Satheesan ने पद संभालते ही राज्य की पूर्व एलडीएफ सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर समीक्षा शुरू कर दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सतीशन ने ऐलान किया है कि केरल सरकार ने बहुचर्चित सिल्वरलाइन हाई-स्पीड रेल परियोजना को रद्द करने का फैसला किया है।
तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि राज्य कैबिनेट ने इस परियोजना को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह परियोजना पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल थी, जिसे साल 2019 में शुरू किया गया था।
क्या था सिल्वरलाइन परियोजना का उद्देश्य?
सिल्वरलाइन हाई-स्पीड रेल परियोजना का उद्देश्य केरल के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ना था। इस परियोजना के तहत राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को उत्तरी जिले कासरगोड से जोड़ा जाना प्रस्तावित था। योजना का मकसद यात्रा समय को कम करना और राज्य के विभिन्न हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना था, ताकि उत्तर और दक्षिण केरल के लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके।
भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाएं होंगी वापस
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने जानकारी दी कि सिल्वरलाइन परियोजना से संबंधित भूमि अधिग्रहण की सभी अधिसूचनाओं को वापस लिया जाएगा। इसके अलावा, परियोजना का विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को भी वापस लेने की सिफारिश की जाएगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम फैसला न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन होगा।
PSC रैंक सूची की अवधि भी बढ़ाई गई
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने लोक सेवा आयोग (PSC) की रैंक सूचियों की वैधता 30 नवंबर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि चुनाव अवधि के दौरान नियुक्तियों की प्रक्रिया काफी प्रभावित हुई थी, इसलिए अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
नई सरकार के इन फैसलों को राज्य की प्रशासनिक दिशा में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि सिल्वरलाइन परियोजना रद्द किए जाने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज होने की संभावना है।