भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस: गोलियों की संख्या पर नया विवाद, परिजनों ने उठाए जांच पर सवाल
बिहार: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर नए सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार विवाद मृतक के शरीर में लगी गोलियों की संख्या को लेकर सामने आया है। परिजनों का दावा है कि अस्पताल में दर्ज मेडिकल जानकारी और पुलिस की ओर से दी गई जानकारी में अंतर है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की सच्चाई न्यायिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
गोलियों की संख्या को लेकर परिजनों का दावा
भरत भूषण तिवारी के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर ने उनके शरीर पर चार से पांच गोलियों के निशान होने की बात कही थी, जबकि पुलिस की ओर से दी गई जानकारी इससे अलग बताई गई। परिवार का कहना है कि यदि दोनों विवरणों में अंतर है, तो इसकी निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए।
डॉक्टर के कथित बयान में क्या कहा गया?
सदर अस्पताल, आरा में उस समय ड्यूटी पर तैनात रहे डॉ. एम.एच. अंसारी का एक कथित वीडियो सामने आया है। वीडियो में डॉक्टर यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि गंभीर अवस्था में अस्पताल लाए गए भरत भूषण तिवारी के शरीर पर चार से पांच गोली लगने के निशान थे। उनके अनुसार, तीन गोलियां कमर के निचले हिस्से में लगी थीं, जबकि एक गोली पेट के आसपास लगी थी। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी स्थिति गंभीर थी, जिसके बाद प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मां ने भी उठाए सवाल
मृतक की मां आशा देवी ने भी पुलिस के दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में उन्हें बताया गया था कि उनके बेटे को दो या तीन गोलियां लगी थीं, लेकिन बाद में अस्पताल में शरीर पर अधिक गोली लगने के निशान होने की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि शरीर के निचले हिस्से और कमर में कई गोलियां लगी थीं, जबकि एक गोली शरीर को आर-पार कर गई थी। उनके अनुसार, अत्यधिक रक्तस्राव के कारण ही बेटे की मौत हुई।
मेडिकल और पुलिस रिकॉर्ड के मिलान की मांग
परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रहेंगे।
पहले भी उठ चुके हैं कई सवाल
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर इससे पहले भी प्राथमिकी, पुलिस कार्रवाई और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब गोलियों की संख्या को लेकर सामने आए नए दावों ने इस मामले को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
न्यायिक जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी विनोद कुमार सिन्हा कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें जांच रिपोर्ट का इंतजार है और उम्मीद है कि इससे यह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, कितनी गोलियां चलीं और किन परिस्थितियों में भरत भूषण तिवारी की मृत्यु हुई।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि किसी भी एनकाउंटर मामले में मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, बैलिस्टिक रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम साक्ष्य होते हैं। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले न्यायिक जांच पूरी होने का इंतजार करना आवश्यक है। अब पूरे मामले में सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे परिजनों के आरोपों और पुलिस के दावों के बीच की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।