Maratha Reservation Protest: मनोज जरांगे को मुंबई पुलिस का झटका, आजाद मैदान में आमरण अनशन की नहीं मिली अनुमति; जानें 4 वजह
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन एक बार फिर गरमा सकता है। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई के आजाद मैदान में 19 सितंबर से आमरण अनशन करने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, मुंबई पुलिस ने उनके प्रस्तावित आंदोलन को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
आजाद मैदान पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजू बिडकर की ओर से इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। पुलिस ने अनुमति नहीं देने के पीछे चार प्रमुख कारण बताए हैं।
गणेशोत्सव के कारण सुरक्षा व्यवस्था का हवाला
पुलिस के मुताबिक, मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है और सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाता है।
ऐसे में एक बड़े आंदोलन के आयोजन से सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। पुलिस ने इसी वजह से प्रस्तावित आमरण अनशन को अनुमति देने से इनकार किया है।
कोर्ट के आदेश और नए नियम का भी दिया हवाला
मुंबई पुलिस ने अनुमति नहीं देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अमित साहनी मामले में दिए गए आदेश और बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया है।
इसके अलावा पुलिस ने ‘सार्वजनिक सभा, आंदोलन एवं जुलूस नियम 2025’ की धारा 46(5) और 46(6) का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन परिस्थितियों में प्रस्तावित आंदोलन को अनुमति नहीं दी जा सकती।
4 से 4.5 हजार प्रदर्शनकारियों के आने की जानकारी
मनोज जरांगे पाटील की ओर से करीब 4,000 से 4,500 प्रदर्शनकारियों के आने की जानकारी दी गई थी। पुलिस का कहना है कि आजाद मैदान में इतनी संख्या में लोगों को समायोजित करने की क्षमता नहीं है।
पुलिस ने पिछले आंदोलन का भी हवाला दिया। उसके मुताबिक, 2025 में हुए आंदोलन के दौरान मुंबई के ट्रैफिक, स्कूल, कारोबार और अस्पतालों पर असर पड़ा था। ऐसे में इस बार भी इतने बड़े प्रदर्शन से मुंबई के सामान्य जनजीवन के प्रभावित होने की आशंका है।
पिछले आंदोलन और ‘मुंबई बंद’ का भी जिक्र
मुंबई पुलिस ने पिछले साल के आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति का भी उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार, उस दौरान करीब 5 हजार प्रदर्शनकारी पहुंचे थे और कुछ लोगों के खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए थे।
इसके अलावा पुलिस ने यह भी कहा है कि आवेदक की ओर से पहले ही ‘मुंबई बंद’ का आह्वान किया गया है। ऐसे में पुलिस को कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा होने की आशंका है।
इन सभी कारणों के आधार पर मुंबई पुलिस ने 19 सितंबर से आजाद मैदान में प्रस्तावित मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
पहले दे चुके हैं मुंबई कूच का अल्टीमेटम
इससे पहले मनोज जरांगे पाटील ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर 12 सितंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वह मुंबई कूच करेंगे।
अब मुंबई पुलिस की ओर से आजाद मैदान में आंदोलन की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।
कौन हैं मनोज जरांगे पाटील?
मनोज जरांगे पाटील महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन का प्रमुख चेहरा हैं। वह लंबे समय से मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।
जरांगे कई बार आमरण अनशन भी कर चुके हैं और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करते रहे हैं। वह किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नेता के तौर पर नहीं, बल्कि मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं।
अब आजाद मैदान में प्रस्तावित आंदोलन को अनुमति नहीं मिलने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मनोज जरांगे पाटील और उनके समर्थक आगे क्या कदम उठाते हैं।