• August 31, 2026

पलनी मंदिर की 1.4 एकड़ जमीन की फर्जी रजिस्ट्री से हड़कंप, दो रजिस्ट्रार निलंबित; CB-CID करेगी जांच

तमिलनाडु के प्रसिद्ध पलनी दंडायुधस्वामी मंदिर की 1.4 एकड़ जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आने के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि तीन निजी व्यक्तियों ने मिलकर मंदिर की जमीन को अपने नाम कराने की साजिश रची और उसकी रजिस्ट्री करवा ली।

मामले का खुलासा होने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दिंडीगुल जिला रजिस्ट्रार ससिकला और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े पलनी के सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिगंडन को निलंबित कर दिया है।

मद्रास हाई कोर्ट ने रजिस्ट्री रद्द करने का दिया आदेश

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए विवादित जमीन की रजिस्ट्री रद्द करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने मंदिर की जमीन से जुड़ी अनियमितताओं की जांच क्राइम ब्रांच-सीआईडी (CB-CID) को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, यह 1.4 एकड़ जमीन पलनी पहाड़ी की तलहटी में स्थित है और मंदिर प्रशासन इसका उपयोग श्रद्धालुओं के लिए फ्री पार्किंग के रूप में करता रहा है।

दस्तावेजों के मुताबिक, करीब 100 वर्ष पहले यह जमीन दंडायुधस्वामी मठ के नाम दर्ज की गई थी। इसके बावजूद मुरुगदास नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को जमीन का उत्तराधिकारी बताते हुए इसे वेल्लईदुरई और सेतुपति नाम के दो व्यक्तियों को बेच दिया।

यह मंदिर तमिलनाडु सरकार के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के अधीन आता है।

मंदिर प्रशासन ने पहले ही दी थी चेतावनी

मंदिर प्रशासन को पिछले वर्ष ही जानकारी मिल गई थी कि मुरुगदास इस जमीन को बेचने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने जिला रजिस्ट्रार कार्यालय को कई पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि यह मंदिर की संपत्ति है और इसकी रजिस्ट्री नहीं की जानी चाहिए।

मार्च महीने में भी जमीन की रजिस्ट्री कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन उस समय के सब-रजिस्ट्रार ने इसे मंदिर की जमीन बताते हुए आवेदन खारिज कर दिया था।

कोर्ट के आदेश के बाद फिर हुई रजिस्ट्री की कोशिश

बताया जा रहा है कि रजिस्ट्री से इनकार किए जाने के बाद संबंधित पक्ष अदालत पहुंचा और दस्तावेजों के आधार पर राहत प्राप्त की। इसके बाद जुलाई में एक बार फिर जमीन की रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।

इस दौरान पहले सब-रजिस्ट्रार का तबादला हो गया और बाद में छुट्टी पर जाने के कारण नए अधिकारी ने कार्यभार संभाला। आरोप है कि इसी दौरान 6 जुलाई को विवादित जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।

निलंबित अधिकारी ने मांगी अग्रिम जमानत

विवाद बढ़ने के बाद निलंबित सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिगंडन ने दावा किया है कि उन्हें मामले के पूरे इतिहास की जानकारी नहीं थी। हालांकि, मामले में नाम सामने आने के बाद उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन कर दिया है।

सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि CB-CID की जांच में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी और यदि किसी अधिकारी या व्यक्ति की भूमिका पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, मंदिर की जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री का यह मामला राज्य में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन गया है, जिस पर सभी की नजरें CB-CID की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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