• June 23, 2026

उद्धव ठाकरे की बैठक से 3 विधायक और 1 एमएलसी रहे नदारद, शिवसेना (UBT) ने बताया वजह

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) को एक और झटका लगने की चर्चाओं के बीच सोमवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई विधायकों की बैठक में तीन विधायक और एक विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) शामिल नहीं हुए। हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित नेताओं ने अपनी अनुपस्थिति की जानकारी पहले ही दे दी थी। उद्धव ठाकरे ने विधानसभा सत्र के पहले दिन मुंबई स्थित पार्टी कार्यालय ‘शिवालय’ में शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों और एमएलसी की बैठक की अध्यक्षता की। पार्टी के कुल 20 विधायक और 6 एमएलसी हैं, लेकिन बैठक में 22 सदस्य ही मौजूद रहे।

ये नेता बैठक में नहीं पहुंचे

बैठक में एमएलसी सुनील शिंदे, विधायक संजय पोटनिस (कलिना) और राहुल पाटिल (परभणी) शामिल नहीं हुए। राहुल पाटिल ने बताया कि वे विधान परिषद चुनाव की मतगणना प्रक्रिया और परभणी में उद्धव ठाकरे के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों में व्यस्त थे। वहीं, एमएलसी सुनील शिंदे ने कहा कि वह अपने गृह नगर चिपलूण में थे और मुंबई लौट रहे थे। विधायक संजय पोटनिस ने अनुपस्थिति का कोई विशेष कारण नहीं बताया, लेकिन यह जरूर कहा कि वे शिवसेना (यूबीटी) के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं।

पार्टी ने दी सफाई

शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं का कहना है कि बैठक में शामिल नहीं हो पाने वाले सभी सदस्यों ने पहले से इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को दे दी थी। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी को किसी राजनीतिक संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा

बैठक में मौजूद एक विधायक के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं को राज्य सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरने का निर्देश दिया। इनमें कृषि ऋण माफी को अपर्याप्त बताना, राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और ड्रग तस्करी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

शिंदे गुट में शामिल हुए बागी सांसद

इसी दिन शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में उनकी अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गए। यह कार्यक्रम यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया, जो ‘शिवालय’ से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस मौके पर एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बयानबाजी और गाली-गलौज की राजनीति से बचना चाहिए। शिंदे ने कहा कि जितनी अधिक आलोचना और अपशब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा, उतना ही पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

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