कर्नाटक में फिर तेज हुई CM बदलने की अटकलें, सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार की लंच मीटिंग से बढ़ी हलचल
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच सत्ता संतुलन को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच अब मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा फिर तेज हो गई है। इसकी वजह हाल ही में हुई एक अहम लंच मीटिंग को माना जा रहा है।
दरअसल, 18 मई को राज्य के ऊर्जा मंत्री K. J. George के आवास पर एक महत्वपूर्ण लंच मीटिंग आयोजित हुई थी। इस बैठक में Mallikarjun Kharge, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार शामिल हुए थे। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के बाद से सत्ता परिवर्तन की अटकलों को नया बल मिला है।
क्या कर्नाटक में सचमुच बदल सकता है मुख्यमंत्री?
हालांकि राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, लेकिन फिलहाल तत्काल किसी बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, Rahul Gandhi अगले एक सप्ताह तक किसी महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक के लिए उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कर्नाटक नेतृत्व को लेकर कोई बड़ा फैसला फिलहाल टल सकता है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह के बाद ही इस दिशा में कोई ठोस राजनीतिक गतिविधि देखने को मिल सकती है।
गौरतलब है कि इसी बैठक के अगले दिन राज्य में सिद्धारमैया सरकार ने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे किए हैं। ऐसे समय में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
डीके शिवकुमार के लिए राह आसान नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नेतृत्व परिवर्तन होता भी है, तो डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना उतना आसान नहीं होगा जितना माना जा रहा है। पूर्व मंत्री और सिद्धारमैया समर्थक माने जाने वाले के. राजन्ना ने हाल ही में संकेत दिए कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि यदि सिद्धारमैया को हटाया जाता है, तो उनकी जगह मौजूदा गृह मंत्री G. Parameshwara को मौका दिया जाए।
इसी बीच सिद्धारमैया खेमे के माने जाने वाले मंत्री एच.सी. महादेवप्पा, जमीर अहमद खान और अन्य नेताओं की जी. परमेश्वर के साथ हुई बैठक ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। इस बैठक में वरिष्ठ नेता और मंत्री Satish Jarkiholi भी मौजूद थे, जो लंबे समय से पार्टी संगठन में बड़ी भूमिका की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं का एक वर्ग डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में नहीं दिख रहा।
क्या सिद्धारमैया खेमे की रणनीति है यह सियासी हलचल?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि विधायकों की सक्रियता और मौजूदा हलचल के पीछे सिद्धारमैया समर्थक गुट की रणनीति हो सकती है। माना जा रहा है कि इससे पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाया जा सकता है ताकि मुख्यमंत्री को बदलने का फैसला आसान न हो। साथ ही यदि केवल मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है, तो सिद्धारमैया के लिए अपना शेष कार्यकाल पूरा करने की संभावना मजबूत हो सकती है।
फिलहाल कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर असमंजस बना हुआ है। यदि मुख्यमंत्री बदलने का फैसला होता है, तो अगला चेहरा कौन होगा, यह तय करना पार्टी हाईकमान के लिए आसान नहीं होगा। ऐसे में अगले सप्ताह से राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।