बिहार में ‘सहयोग शिविर’ की शुरुआत, 30 दिन में आवेदन निपटाने का सख्त नियम; सम्राट चौधरी ने सोनपुर से किया शुभारंभ
बिहार में एनडीए सरकार ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। राज्य के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने सारण जिले के सोनपुर के डुमरी बुजुर्ग गांव से “सहयोग शिविर” योजना की औपचारिक शुरुआत की।
इस योजना के तहत राज्य की सभी पंचायतों में नियमित शिविर लगाए जाएंगे, जहां आम लोगों की समस्याओं और आवेदनों का समाधान तय समयसीमा में किया जाएगा।
30 दिन में निपटाना होगा हर आवेदन
नई व्यवस्था के अनुसार, किसी भी आवेदन को अधिकतम 30 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा। प्रक्रिया के तहत:
- 10 दिन के भीतर संबंधित अधिकारी को पहला नोटिस
- 20 दिन पर दूसरा नोटिस
- 25 दिन पर तीसरा चेतावनी नोटिस
- और 30 दिन में अनिवार्य रूप से निर्णय लेना होगा
यदि कोई अधिकारी तय समयसीमा में आवेदन का निपटारा नहीं करता है, तो 31वें दिन मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा स्वतः निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
सीएम कार्यालय से रियल-टाइम मॉनिटरिंग
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया है। सभी शिकायतें और आवेदन “सहयोग पोर्टल” पर दर्ज किए जाएंगे, ताकि मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर लगातार निगरानी हो सके।
शिविर हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित किए जाएंगे। इन्हें पंचायत सरकार भवन या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाएगा, जहां अंचल, प्रखंड और थाना स्तर के अधिकारी एक साथ लोगों की समस्याएं सुनेंगे।
कौन-कौन से मामले होंगे शामिल
इन शिविरों में कई प्रकार की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—
- भूमि विवाद और दाखिल-खारिज
- जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र
- राशन और पेंशन से जुड़ी समस्याएं
- मनरेगा और आवास योजनाएं
- बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित शिकायतें
इसके अलावा, लोग 1100 हेल्पलाइन नंबर पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
‘नोएडा की तरह विकसित होगा सोनपुर’
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सोनपुर क्षेत्र के विकास के लिए विशेष योजना पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में एयरपोर्ट, टाउनशिप और औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि स्थानीय रोजगार बढ़ सके और क्षेत्र का विकास राष्ट्रीय स्तर पर हो।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की जमीन टाउनशिप परियोजना में आएगी, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा।
सरकार का दावा: पारदर्शिता और तेज समाधान
सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना और आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। अधिकारियों पर सख्त समयसीमा लागू कर जवाबदेही तय करने की कोशिश की गई है।