तमिलनाडु चुनाव 2026: बीजेपी ने जारी किया संकल्प पत्र, महिलाओं और कल्याण योजनाओं पर फोकस
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Madhulika- April 14, 2026
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तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को लेकर Bharatiya Janata Party (बीजेपी) ने मंगलवार को अपना चुनावी संकल्प पत्र जारी किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री J. P. Nadda, तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष Nainar Nagendran, पार्टी नेता K. Annamalai और Tamilisai Soundararajan मौजूद रहे।
घोषणापत्र को तमिल नव वर्ष के अवसर पर जारी करते हुए जेपी नड्डा ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि पार्टी राज्य के विकास और जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
संकल्प पत्र के प्रमुख वादे
बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की है, जिनमें विशेष रूप से महिलाओं और आम परिवारों को ध्यान में रखा गया है—
- घर की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता
- सालाना तीन मुफ्त LPG सिलेंडर देने का वादा
- महंगाई और टैक्स के बोझ को कम करने के लिए हर परिवार को एक बार में 10,000 रुपये की सहायता
- पात्र महिलाओं को ई-स्कूटर खरीदने पर 25,000 रुपये की सब्सिडी
- पहली बार घर खरीदने वाली महिलाओं के लिए स्टाम्प ड्यूटी में 3% की छूट
- 10,000 रुपये की एकमुश्त घरेलू सहायता और 8,000 रुपये के घरेलू सामान कूपन
इसके अलावा, पारंपरिक खेल जलीकट्टू से जुड़े पशुपालकों के लिए भी सहायता का ऐलान किया गया है। बैलों के पालन-पोषण के लिए हर महीने 2,000 रुपये और प्रतियोगिता के दौरान किसी प्रतिभागी की मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का प्रस्ताव रखा गया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक घोषणाएं
घोषणापत्र में बड़े मंदिरों में स्थानीय निवासियों के लिए रोजाना दो घंटे का विशेष दर्शन स्लॉट आरक्षित करने का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही, कार्तिगई दीपम जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों को जारी रखने की भी बात कही गई है।
DMK सरकार पर निशाना
इस मौके पर जेपी नड्डा ने Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में 51% की वृद्धि हुई है।
नड्डा ने DMK पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी कई कथित घोटालों में घिरी हुई है। उन्होंने सत्ताधारी दल को “भ्रष्टाचार का रक्षक” करार दिया।
बीजेपी का यह संकल्प पत्र आगामी चुनावों में मतदाताओं को लुभाने और राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।