महिला आरक्षण पर सियासत तेज, रेवंत रेड्डी और स्टालिन ने उठाए सीटों के असंतुलन के सवाल
महिला आरक्षण के मुद्दे पर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। Revanth Reddy ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए एक फिल्मी डायलॉग का सहारा लिया और कहा, “हम पहले से ही घायल हैं, हमें घातक मत बनाओ।”
दक्षिण भारतीय राज्यों का कहना है कि यदि महिला आरक्षण लागू करने के लिए संसद और विधानसभा सीटों में 50% की बढ़ोतरी की जाती है, तो इससे उत्तर भारतीय राज्यों का राजनीतिक वर्चस्व बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि यह दक्षिण राज्यों के साथ अन्याय होगा।
इन राज्यों का कहना है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से लागू किया है, जिससे उनकी जनसंख्या वृद्धि दर कम रही है। ऐसे में सीटों के पुनर्वितरण के जरिए उन्हें “सजा” नहीं मिलनी चाहिए।
रेवंत रेड्डी ने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान में Uttar Pradesh में 80 सीटें हैं, जो 50% बढ़ने पर 120 हो जाएंगी, जबकि Tamil Nadu में 40 सीटें बढ़कर 60 होंगी। इससे दोनों राज्यों के बीच सीटों का अंतर 40 से बढ़कर 60 हो जाएगा।
उन्होंने मांग की कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सीटों का अनुपात वर्तमान स्तर के समान ही बनाए रखा जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर M. K. Stalin ने भी चिंता जताई है और इसे दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय बताया है।
वहीं, कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में Sonia Gandhi ने महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की मांग उठाई।
महिला आरक्षण को लेकर अब बहस केवल लैंगिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह क्षेत्रीय संतुलन, जनसंख्या नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे बड़े मुद्दों से भी जुड़ गई है। आने वाले समय में यह विषय राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।