ईरान-इज़रायल युद्ध शुरू: अमेरिका भी शामिल, भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इज़रायल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, जिसे इज़रायल ने ‘प्री-एम्प्टिव अटैक’ करार दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस’ की घोषणा की है, जिसमें ईरान के मिसाइल उद्योग, नौसेना और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाने की बात कही गई है। तेहरान, कोम, इस्फहान सहित कई ईरानी शहरों में विस्फोटों की खबरें हैं। जवाब में ईरान ने इज़रायल पर 30 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं।
यह संघर्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल विकास को लेकर अमेरिका-इज़रायल की चिंताओं के बीच शुरू हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला तो भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक हितों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका
भारत अपनी 80-85% तेल आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें खाड़ी देशों (सऊदी अरब, इराक, यूएई) से बड़ा हिस्सा आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग को प्रभावित करता है, तो आपूर्ति बाधित हो सकती है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें पहले से ही बढ़कर लगभग 72-73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच चुकी हैं। ताजा हमलों से और तेजी आने की संभावना है। लंबे युद्ध में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत में भारी वृद्धि हो सकती है।
भारत अपनी 80-85% तेल आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें खाड़ी देशों (सऊदी अरब, इराक, यूएई) से बड़ा हिस्सा आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग को प्रभावित करता है, तो आपूर्ति बाधित हो सकती है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें पहले से ही बढ़कर लगभग 72-73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच चुकी हैं। ताजा हमलों से और तेजी आने की संभावना है। लंबे युद्ध में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत में भारी वृद्धि हो सकती है।
ग्रामीण और मध्यम वर्ग पर बढ़ेगा बोझ
तेल कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ सकती है, जो ग्रामीण और मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर डालेगी। उद्योग, एयरलाइंस और आम उपभोक्ता प्रभावित होंगे। भारत पहले से रूस से तेल आयात बढ़ा रहा है, लेकिन लंबे संघर्ष में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
तेल कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ सकती है, जो ग्रामीण और मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर डालेगी। उद्योग, एयरलाइंस और आम उपभोक्ता प्रभावित होंगे। भारत पहले से रूस से तेल आयात बढ़ा रहा है, लेकिन लंबे संघर्ष में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
शेयर बाजार और व्यापार पर दबाव
वैश्विक अनिश्चितता से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट की आशंका है। लाल सागर और होर्मुज मार्ग में बाधा से जहाजों को केप ऑफ गुड होप जैसे लंबे रूट से जाना पड़ सकता है, जिससे शिपिंग लागत बढ़ेगी। भारत का निर्यात (बासमती चावल, दवाएं, कपड़ा) महंगा हो सकता है। ईरान से दालें, ड्राई फ्रूट्स और उर्वरक आयात पहले से प्रभावित है और और खराब हो सकता है।
वैश्विक अनिश्चितता से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट की आशंका है। लाल सागर और होर्मुज मार्ग में बाधा से जहाजों को केप ऑफ गुड होप जैसे लंबे रूट से जाना पड़ सकता है, जिससे शिपिंग लागत बढ़ेगी। भारत का निर्यात (बासमती चावल, दवाएं, कपड़ा) महंगा हो सकता है। ईरान से दालें, ड्राई फ्रूट्स और उर्वरक आयात पहले से प्रभावित है और और खराब हो सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया और सुरक्षा चिंताएं
भारत-इज़रायल के बीच मजबूत रक्षा और तकनीकी संबंध हैं। भारत ने इज़रायल में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है, जिसमें अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वापस लाने के लिए ऑपरेशन चलाया जा सकता है।
भारत-इज़रायल के बीच मजबूत रक्षा और तकनीकी संबंध हैं। भारत ने इज़रायल में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है, जिसमें अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वापस लाने के लिए ऑपरेशन चलाया जा सकता है।
यह स्थिति तेजी से बदल रही है। भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकती है।