नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला, इतिहास तोड़ने का आरोप
23 जनवरी, 2026 को देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है। इस अवसर पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संसद में बीते महीने राष्ट्रगीत और वंदे मातरम पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की कोशिशों से राष्ट्रगीत, महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की यादें और विरासत खतरे में पड़ सकती हैं।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पीएम मोदी व्यवस्थागत रूप से महात्मा गांधी की यादों और उनके योगदान को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “बीते महीने संसद में राष्ट्रगीत पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी बेनकाब हो गए। राष्ट्रगान के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई और इस दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान करने का प्रयास हुआ।”
जयराम रमेश ने आगे कहा कि आज का दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है, जिन्होंने 1937 में वंदे मातरम को लेकर हुए विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने जानबूझकर इस ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख नहीं किया।
नेताजी और राष्ट्रगीत का ऐतिहासिक महत्व
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय पहचान और प्रतीकों को महत्व देने का कार्य किया।
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि नेताजी के परपोते और इतिहासकार सुगत बोस के अनुसार, 2 नवंबर 1942 को बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर के उद्घाटन समारोह में नेताजी ने राष्ट्रगान के दौरान पहली बार ‘जन गण मन’ गाया।
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इसके अलावा, नेताजी ने 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से अपने संदेश में पहली बार महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में वंदे मातरम और राष्ट्रगीत पर चर्चा के दौरान इन ऐतिहासिक तथ्यों का जानबूझकर उल्लेख नहीं किया, जिससे नेताजी की भूमिका और महात्मा गांधी की विरासत को कमजोर किया जा रहा है।
संसद में वंदे मातरम पर बहस
बीते माह संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में चर्चा हुई थी। इस दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा वंदे मातरम पर राजनीति कर रही है, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावों के मद्देनजर।
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि बंगाल में चुनाव होने के कारण वंदे मातरम पर विशेष चर्चा कर विपक्षी दलों को निशाना बनाया जा रहा है।
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इसके जवाब में सत्तापक्ष ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
जयराम रमेश का तीखा हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर यह आरोप भी लगाया कि वे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने में सबसे माहिर हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोशिशें केवल इतिहास को विकृत नहीं करती, बल्कि देश के भावी नागरिकों को भी गलत ऐतिहासिक जानकारी पर भरोसा करने पर मजबूर कर सकती हैं।
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रमेश ने कहा कि वंदे मातरम और राष्ट्रगान के इतिहास को सही तरीके से समझना आवश्यक है।
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उन्होंने उदाहरण दिया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों को स्वतंत्रता संग्राम में जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “अब प्रधानमंत्री महात्मा गांधी की यादों और विरासत को व्यवस्थागत तरीके से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, और इसका ताजा उदाहरण मनरेगा कानून को वापस लेना है।”
कांग्रेस के आरोपों की पृष्ठभूमि
कांग्रेस के आरोप इस तथ्य पर आधारित हैं कि हाल की संसद चर्चा में कुछ सत्ताधारी नेता इतिहास के महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
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वंदे मातरम और राष्ट्रगान जैसे राष्ट्रीय प्रतीक केवल गीत या शब्दों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और देशभक्ति के प्रतीक हैं।
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कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी इन प्रतीकों का राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
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इस तरह की टिप्पणियों और चर्चाओं से इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं पर संदेह और भ्रम फैल सकता है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का महत्व
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक थे।
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नेताजी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में फॉर इंडिया नेशनल आर्मी (INA) की स्थापना की और भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाई।
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उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और वंदे मातरम को स्वतंत्रता आंदोलन में जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
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नेताजी की दूरदर्शिता और नेतृत्व ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री को नेताजी की ऐतिहासिक भूमिका को सही तरीके से याद रखना चाहिए और इसे राजनीति के लिए विकृत नहीं करना चाहिए।
राजनीतिक लड़ाई और मीडिया का रुख
वंदे मातरम और राष्ट्रगीत पर हुई बहस ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा इतिहास को राजनीतिक लाभ के लिए मोड़ रही है।
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मीडिया और विशेषज्ञों ने कहा कि यह बहस केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों और इतिहास की समझ पर भी असर डाल सकती है।
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कांग्रेस नेताओं ने सुझाव दिया कि संसद में इस तरह की बहसों में सटीक ऐतिहासिक तथ्यों को रखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला इतिहास, राष्ट्रीय प्रतीकों और राजनीतिक विवाद के केंद्र में है।
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कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रगीत और वंदे मातरम के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया।
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जयराम रमेश ने इसे महात्मा गांधी और नेताजी की विरासत पर हमला बताया।
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सांसदों और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर संसद में बहस की।
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यह बहस यह दर्शाती है कि राष्ट्रीय प्रतीक और इतिहास केवल गीत या कानून नहीं हैं, बल्कि राजनीति, भावनाओं और नैतिक जिम्मेदारी से जुड़े हुए हैं।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि इतिहास को सही तरीके से याद रखना और उसे राजनीति से अलग रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राष्ट्रीय चेतना के लिए जरूरी है। कांग्रेस का आरोप है कि अगर इतिहास को राजनीतिक दृष्टिकोण से पेश किया जाता है, तो यह न केवल राष्ट्र के प्रतीकों की महत्ता को कम करता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भ्रम और असमंजस भी पैदा कर सकता है।