यूपी में 6 महीने के लिए लगी हड़ताल पर रोक: योगी सरकार ने ESMA लागू किया, बिजली कर्मचारियों की चेतावनी के बाद बड़ा कदम
लखनऊ, 12 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) को तत्काल प्रभाव से 6 महीने के लिए लागू कर दिया। इसके तहत राज्य के सभी सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों, प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों में कार्यरत कर्मचारियों पर हड़ताल का पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला मुख्य रूप से बिजली विभाग के कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को विफल करने के उद्देश्य से लिया गया, ताकि जनता को बिजली आपूर्ति में कोई व्यवधान न हो। अधिसूचना मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने जारी की है।
ESMA क्या है और क्यों लागू किया गया?
- ESMA का मतलब: आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (Uttar Pradesh Essential Services Maintenance Act, 1966) एक केंद्रीय कानून है, जो सार्वजनिक हित में आवश्यक सेवाओं (जैसे बिजली, पानी, स्वास्थ्य) में हड़ताल को अवैध घोषित करता है। इसका उद्देश्य आम जनता को होने वाली असुविधा रोकना है।
- कारण: बिजली विभाग के संगठन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (VKSSS) ने प्रमोशन, पेंशन, वेतन विसंगतियों और प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ 7 दिसंबर से हड़ताल की धमकी दी थी। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने भी मांगें उठाईं। सरकार ने कहा कि हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों और अस्पतालों में बिजली कटौती हो सकती है, इसलिए ESMA लगाकर सेवाओं को सुचारू रखा जा रहा है।
हड़ताल पर क्या होगा प्रतिबंध?
- लागू क्षेत्र: यह सभी सरकारी विभागों (बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि), UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के डिस्कॉम्स, स्थानीय निकायों और प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप मॉडल पर चलने वाली कंपनियों (जैसे पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम) में लागू होगा।
- समयसीमा: अधिसूचना जारी होने की तारीख से 6 महीने (जून 2026 तक)।
- उल्लंघन पर सजा: हड़ताल करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ IPC धारा 3 के तहत कार्रवाई। सजा में 6 महीने से 1 साल तक की जेल, 1,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों। पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है। कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की नौकरी तुरंत समाप्त हो सकती है।
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख
- कर्मचारी संगठनों का विरोध: VKSSS के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि सरकार की यह ‘तानाशाही’ है। वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन मांगें (जैसे प्राइवेटाइजेशन रोकना, समान भत्ते, आउटसोर्सिंग बंद) पूरी न होने पर आंदोलन जारी रखेंगे।
- सरकार की चेतावनी: ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा, “सेवाओं में व्यवधान बर्दाश्त नहीं। बातचीत का दरवाजा खुला है, लेकिन जनहित सर्वोपरि।” यह ESMA लगाने का यह तीसरा मौका है (पहले 2021 में कोविड के दौरान और 2024 में)।