• January 2, 2026

Uranium Contamination In Water: पंजाब से यूपी तक भूजल में ज़हर! किन राज्यों में स्थिति सबसे गंभीर, क्या है आगे का खतरा?

Uranium Contamination In Water: उत्तर भारत (North India) के निवासी पहले से ही प्रदूषित हवा के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं, और अब केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 ने एक नए और बड़े खतरे की घंटी बजा दी है। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देशभर से लिए गए भूजल के नमूनों में से 13–15% में खतरनाक यूरेनियम संदूषण पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली (Delhi), पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana), राजस्थान (Rajasthan) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) जैसे प्रमुख राज्यों में भूजल की गुणवत्ता भारतीय मानक (BIS) से कहीं अधिक खराब हो चुकी है। यह संदूषण न केवल पीने के पानी बल्कि सिंचाई (Irrigation) और मिट्टी की गुणवत्ता (Soil Quality) के लिए भी गंभीर खतरा है। किन राज्यों में प्रदूषण सबसे अधिक फैला है और यह बढ़ता संकट कितना खतरनाक है? लोगों में इसे लेकर चिंता बढ़ गई है। तो चलिए जानते हैं पूरी खबर क्या है, जानते हैं विस्तार से…

भूजल पर बढ़ता रासायनिक और भारी धातु का प्रहार

उत्तर भारत (North India) का विशाल क्षेत्र अपनी कृषि और पीने के पानी के लिए मुख्य रूप से भूजल (Groundwater) पर निर्भर है। दुर्भाग्य से, पिछले कुछ वर्षों में इस अनमोल संसाधन पर रासायनिक और भारी धातुओं का प्रहार बढ़ा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) द्वारा वर्ष 2024 में एकत्र किए गए लगभग 15,000 नमूनों के विश्लेषण ने इसकी पुष्टि की। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), राजस्थान (Rajasthan), हरियाणा (Haryana), पंजाब (Punjab) और दिल्ली (Delhi) जैसे अति-निर्भर राज्यों में यूरेनियम (Uranium) के साथ-साथ फ्लोराइड (Fluoride), नाइट्रेट (Nitrate), लवणता (Salinity), और अन्य गंभीर संदूषक जैसे ईसी (EC), एसएआर (SAR) और आरएससी (RSC) सीमा से अधिक पाए गए हैं। अत्यधिक भूजल दोहन, रासायनिक खादों का अंधाधुंध उपयोग और औद्योगिक कचरे का अवैज्ञानिक निपटान इस तेजी से बिगड़ती स्थिति के मुख्य कारण हैं। रिपोर्ट बताती है कि उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India) की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहाँ भूजल तेजी से असुरक्षित श्रेणी में जा रहा है।

यूरेनियम हॉटस्पॉट और दिल्ली-NCR में खारेपन का भीषण संकट

केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में कई राज्यों को संकट ज़ोन के रूप में चिन्हित किया गया है। पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana) और दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) एक नए यूरेनियम हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं, जहाँ भूजल में यूरेनियम की मात्रा मानक सीमा से अधिक पाई गई है, जो सीधे किडनी (Kidney) और हड्डियों को प्रभावित कर सकती है। वहीं, राजस्थान (Rajasthan) में 47.12% नमूनों में अत्यधिक ईसी (EC – Electrical Conductivity) दर्ज किया गया है, जो पानी के अत्यधिक खारेपन को दर्शाता है। राजधानी दिल्ली (Delhi) में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। यहाँ 86 स्थानों की जांच में 33% नमूनों में पानी अत्यधिक खारा पाया गया, जबकि 51% नमूनों में आरएससी (RSC) की सीमा पार हो गई। आरएससी का यह उच्च स्तर सिंचाई के लिए गंभीर खतरा है, क्योंकि यह मिट्टी को अनुपजाऊ बना देता है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कई क्षेत्रों में नाइट्रेट और कुछ भागों में आर्सेनिक संदूषण तेजी से फैल रहा है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण और नागरिक अधिकार का सवाल

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) ने भूजल संदूषण के कारणों का विश्लेषण करते हुए बताया है कि यूरेनियम (Uranium) का फैलाव मुख्य रूप से भू-जनित तत्वों से संबंधित है, जिसे भूजल स्तर में गिरावट (Groundwater Depletion) और अंधाधुंध दोहन ने बढ़ाया है। दिल्ली (Delhi) में खारेपन और आरएससी का उच्च स्तर न सिर्फ पीने के लिए बल्कि कृषि के लिए भी एक बड़ा खतरा है। इस बीच, पर्यावरण कार्यकर्ता पंकज कुमार (Pankaj Kumar) ने दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) को पत्र लिखकर हजारों ट्यूबवेल से पंप किए जा रहे पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका तर्क है कि नागरिकों को यह जानने का मूल अधिकार है कि वे जो पानी पी रहे हैं, वह उनके स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट को कम करने के लिए रसायनों के उपयोग में कटौती, असंतुलित सिंचाई पर रोक और औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए तत्काल कठोर कदम उठाना आवश्यक है।

तत्काल कार्रवाई की सिफारिश और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम

रिपोर्ट के निष्कर्ष स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि अगर तुरंत और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो उत्तर भारत (North India) में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। भूजल में उच्च ईसी, एसएआर और आरएससी का स्तर सीधे कृषि को प्रभावित कर सकता है, जिससे मिट्टी (Soil) की गुणवत्ता तेजी से गिरेगी। इससे खाद्य सुरक्षा (Food Security) को खतरा होगा। दूसरी ओर, यूरेनियम, फ्लोराइड और आर्सेनिक का बढ़ता स्तर सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिससे किडनी फेल्योर (Kidney Damage), हड्डियों की कमजोरी (Bone Weakness) और कैंसर जैसे दीर्घकालिक जोखिम बढ़ते हैं। सीजीडब्ल्यूबी ने दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा को विशेष निगरानी ज़ोन (Special Monitoring Zone) में रखते हुए, राज्यों को नियमित भूजल परीक्षण, उद्योगों की सख्त निगरानी, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल रिचार्ज सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दी है। यह संकट केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और अस्तित्व का सवाल है, जिस पर तत्काल राष्ट्रीय स्तर की कार्ययोजना की आवश्यकता है।

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