लखनऊ में गोमती नदी की बाढ़ से 12 गांव डूबे: बीकेटी-इटौंजा में तबाही, फसलें बर्बाद, बच्चे घरों में कैद
लखनऊ/ 19 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) और इटौंजा क्षेत्र में गोमती नदी के उफान के कारण 12 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। पिछले दो हफ्तों से लगातार बारिश और नेपाल-उत्तराखंड से छोड़े गए पानी ने गोमती का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। गांवों में पानी घुसने से फसलें पूरी तरह डूब गईं, स्कूल बंद हैं, और बच्चे घरों में कैद हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन पर राहत कार्यों में ढिलाई का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन का दावा है कि राहत और बचाव कार्य जोरों पर हैं।
बाढ़ का मंजर
प्रभावित गांव: बीकेटी और इटौंजा के 12 गांव—लासा, अकड़िया कला, अकड़िया खुर्द, सुल्तानपुर, बहादुरपुर, हीरापुरवा, दुघरा, जमखनवा, चांदपुर, मिर्जापुर, बरहा, और हरदा कॉलोनी—बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। ख़बरों की माने तो गोमती नदी का जलस्तर 112.45 मीटर तक पहुंच गया है, जो चेतावनी बिंदु (112 मीटर) से ऊपर और खतरे के निशान (113 मीटर) से थोड़ा नीचे है। धान, मक्का, बाजरा, और सब्जियों की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। स्थानीय किसान रामसेवक ने कहा, “10 बीघा धान की फसल डूब गई, अब कुछ नहीं बचेगा। गांवों को जोड़ने वाले प्रमुख रास्ते और पुल पानी में डूबे हैं। ग्रामीण नावों के सहारे आवागमन कर रहे हैं, लेकिन केवल चार नावें उपलब्ध हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं। स्कूल और कॉलेज बंद होने से बच्चे घरों में कैद हैं। सोशल मीडिया की ख़बरों के मुताबिक इटौंजा की छात्रा रीना ने बताया, “15 दिन से स्कूल बंद है, रास्ते में पानी भरा है, और किताबें भीग गईं।”
प्रशासन की कार्रवाई राहत और बचाव
लखनऊ जिला प्रशासन और SDRF की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। बीकेटी में दो राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां भोजन, पानी, और दवाइयां दी जा रही हैं। प्रशासन ने चार नावें तैनात की हैं, और कुछ गांवों में हेलिकॉप्टर से राशन पहुंचाया जा रहा है। फसल नुकसान का आकलन शुरू हो गया है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सुल्तानपुर और बहादुरपुर जैसे गांवों को बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं किया गया, बल्कि इसे झील का जलस्तर बढ़ना बताया जा रहा है। ख़बरों के मुताबिक बीकेटी के SDM रविंद्र कुमार ने कहा, “हम हर संभव मदद कर रहे हैं। 200 परिवारों को राहत सामग्री दी गई है, और सर्वे के बाद मुआवजा दिया जाएगा।”
ग्रामीणों की शिकायतें
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। लासा गांव के निवासी रमेश यादव ने कहा, “अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, और चले जाते हैं। राशन की कमी है, और नावें कम हैं।” कई ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ की चेतावनी पहले दी गई थी, लेकिन नदियों के कटाव को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए।
मौसम की स्थिति
ख़बरों के अनुसार भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में 20 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। गोमती का जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
निष्कर्ष
लखनऊ के बीकेटी और इटौंजा में गोमती की बाढ़ ने 12 गांवों को तबाह कर दिया है। फसलों की बर्बादी और बच्चों की पढ़ाई पर असर ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह नाकाफी है। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखना जरूरी है