ataltv.com

Hindi News, Breaking Hindi News, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, ताजा हिंदी ख़बरें

रेल की पटरी उखाड़ने के जुर्म में राजाराम रूपौलिया को ब्रिटिश कोर्ट ने दी थी 21 कोड़ों की सजा

आजादी की लड़ाई में जनपद के अनेक क्रांतिकारियों ने अपना योगदान दिया जिन्हें आज भी लोग याद करते हैं। ऐसे ही क्रांतिकारी थे बदौसा कस्बे के पंडित राजाराम रूपौलिया जिन्होंने असहयोग आंदोलन से लेकर आजादी के लिए हुए हर संघर्ष में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्हें अंग्रेजों ने रेल पटरी उखाड़ने के जुर्म में 21 कोड़ों की सजा दी थी और एक अन्य मामले में एक साल की सजा दी थी। यह सजा उन्होंने प्रयागराज की एक जेल में काटी थी।

कस्बे के बदौसा रोड आंबेडकर नगर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजाराम रूपौलिया के घर पर महात्मा गांधी और चंद्रशेखर आजाद भी कुछ दिन ठहरे थे। यहां ठहरने के बाद उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर बैठक करके आजादी की लड़ाई को और तेज करने के लिए रणनीति बनाई थी। पांच नवंबर 1931 को महात्मा गांधी ने अतर्रा के टापू (चौक बाजार) में भाषण दिया और तिरंगा फहराया था। यह जगह अब गांधी चौक के नाम से जानी जाती है। हर वर्ष राजाराम रूपोलिहा 15 अगस्त और 26 जनवरी यहां पर यहां पर झंडा फहराते थे। राजाराम ने 1941 में सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। इस पर अंग्रेजी शासन ने एक साल के कारागार और 10 रुपये जुर्माना लगाया था उन्होंने मलाका जेल वर्तमान में स्वरुप रानी अस्पताल प्रयागराज में सजा की अवधि बिताई थी।

1942 में राजाराम अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी के साथ महासमिति की बैठक में शामिल होने पंजाब मेल ट्रेन से मुंबई गए थे। वहां महासमिति की बैठक को भंग करने के लिए अंग्रेजी पुलिस व सीबीसीआईडी ने धर्मशाला में छापा मारा था। 21 अगस्त 1942 को तुर्रा में रेल पटरी उखाड़ने के जुर्म में 26 अगस्त को अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद ब्रिटिश कोर्ट ने 21 कोड़ों की सजा सुनाई थी।

इस बारेे में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजाराम रुपौलिहा के पौत्र देशबंधु ने बताया कि वह देश आजाद होने के बाद 1949 में अतर्रा नगर पंचायत के प्रथम अध्यक्ष बने और गरीबों का टैक्स माफ किया। उन्हें 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली के लाल किले में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। यह ताम्रपत्र आज भी रखा है। इसी तरह 1950 में जमींदारी उन्मूलन कोष के संग्रह में सहायता प्रदान करने पर तत्कालीन बांदा कलक्टर शिवराम सिंह ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।

इसी तरह 05 फरवरी 1951 को डीआईजी कानपुर एमएस माथुर ने अपराधीकरण को मिटाने व पुलिस की सहायता पर पुरस्कृत किया था। देशबंधु ने बताया कि बाबा राजाराम रूपोलिहा की मृत्यु 13 मई 1982 को उनके आवास पर ही हो गई थी। एक पुत्र जगत सेवक रूपोलिहा थे। जिनका निधन भी कुछ वर्षों पूर्व हो गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *