• January 30, 2026

बरेली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: निलंबित पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री शहर से बाहर रवाना, समर्थकों का भारी हंगामा और पुलिस से तीखी झड़प

बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का केंद्र बने निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के मामले ने बुधवार को उस समय एक नया और नाटकीय मोड़ ले लिया, जब उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच एक निजी वाहन से शहर से बाहर ले जाया गया। इस दौरान बरेली की सड़कों पर जबरदस्त हंगामा, नारेबाजी और पुलिस के साथ समर्थकों की तीखी धक्का-मुक्की देखने को मिली। अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने सुबह खुद को ‘हाउस अरेस्ट’ किए जाने का दावा कर सनसनी फैला दी थी, दोपहर होते-होते अपने समर्थकों को एक रहस्यमयी इशारा कर बरेली से विदा हो गए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान रामपुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर समर्थकों ने जाम लगा दिया, जिसे खुलवाने में पुलिस प्रशासन के पसीने छूट गए।

बुधवार सुबह की शुरुआत ही बेहद तनावपूर्ण रही। निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री अपने सरकारी आवास के गेट पर आए और वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनके ही घर में ‘हाउस अरेस्ट’ कर लिया गया है और प्रशासन ने उन्हें बाहर न निकलने की कड़ी हिदायत दी है। अग्निहोत्री ने निजता के हनन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके आवास पर अनावश्यक रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो कानूनन गलत है। उन्होंने खुद को कानून का पालन करने वाला नागरिक बताते हुए कहा कि वे हिदायतों की वजह से घर के भीतर रुकने को मजबूर हैं। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने स्पष्ट किया कि अलंकार अग्निहोत्री को नजरबंद नहीं किया गया है, बल्कि वे अभी भी सरकारी सेवा में हैं और एक लोकसेवक होने के नाते सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

दोपहर होते-होते माहौल और भी गरमा गया जब अलंकार अग्निहोत्री को शहर से बाहर ले जाने की तैयारी शुरू हुई। सरकारी आवास से बाहर निकलने से ठीक पहले एक दृश्य कैमरे में कैद हुआ जिसमें अग्निहोत्री अफसरों के साथ कुर्सी पर बैठे नजर आए। वहां से उठते समय उन्होंने अपने समर्थकों की ओर पहले ‘विक्ट्री’ का चिह्न दिखाया और फिर एक अंगुली अपने सिर पर रखकर इशारा किया। इस इशारे ने वहां मौजूद समर्थकों के गुस्से में घी का काम किया और वे आक्रोशित होकर नारेबाजी करने लगे। समर्थकों का आरोप था कि एक ईमानदार अधिकारी को साजिश के तहत प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें शहर से जबरन बाहर भेजा जा रहा है।

जैसे ही अग्निहोत्री को एक निजी वाहन में बैठाकर ले जाने का प्रयास शुरू हुआ, समर्थकों ने गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। समर्थकों और पुलिस के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई। पुलिसकर्मियों को रास्ता साफ कराने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। आक्रोशित भीड़ ने रामपुर की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कड़ी घेराबंदी कर किसी तरह निजी वाहन को भीड़ के बीच से निकाला और शहर की सीमा से बाहर करवाया। इसके बाद भी कई समर्थक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान भी सामने आया है। सीओ थर्ड पंकज श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि अलंकार अग्निहोत्री को पुलिस ने नहीं, बल्कि उनके कुछ पारिवारिक मित्र और एक अधिकारी मित्र अपनी निजी कार से अपने साथ ले गए हैं। पुलिस का कहना है कि वे अपनी मर्जी से जा रहे हैं और सुरक्षा कारणों से उनके मित्र उनके साथ हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अग्निहोत्री लखनऊ अपनी पत्नी के पास जा सकते हैं या फिर कानपुर में रहने वाली अपनी मां के पास जा सकते हैं। पुलिस ने यह भी साफ किया कि वे उनके साथ नहीं जा रहे हैं, केवल शहर के भीतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात किया गया था।

बरेली का यह घटनाक्रम प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां अलंकार अग्निहोत्री ने निजता और नजरबंदी के आरोप लगाकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन ने इसे केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल और सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया। शहर में हुए इस हंगामे और जाम के कारण आम जनता को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। फिलहाल, अलंकार अग्निहोत्री बरेली से बाहर जा चुके हैं, लेकिन उनके समर्थकों का आक्रोश और इस मामले से जुड़े सवाल अभी भी हवा में तैर रहे हैं।

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