यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस का महाअभियान: सीतापुर से शुरू होगा 30 महारैलियों का सिलसिला, राहुल-प्रियंका संभालेंगे मोर्चा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बिसात पर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर ली है। आगामी विधानसभा चुनावों को लक्ष्य में रखते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ‘चुनावी मोड’ में आते हुए पूरे प्रदेश में जनसंपर्क और शक्ति प्रदर्शन का एक व्यापक खाका तैयार किया है। इस रणनीति के तहत कांग्रेस उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और मंडलों में 30 से ज्यादा विशाल महारैलियों का आयोजन करने जा रही है। इस चुनावी शंखनाद की औपचारिक शुरुआत शनिवार को सीतापुर जिले से होने जा रही है, जिसे पार्टी के पुनरुत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्थान बिंदु माना जा रहा है।
कांग्रेस के इस विशाल आयोजन का उद्देश्य केवल भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में उत्साह फूंकना और जनता के बीच अपनी नीतियों को मजबूती से रखना है। सीतापुर की पहली महारैली के माध्यम से कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि इन 30 महारैलियों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि प्रदेश का कोई भी कोना अछूता न रहे। इन आयोजनों की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने विभिन्न स्थानों पर स्टार प्रचारकों के रूप में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को आमंत्रित किया है।
सीतापुर में होने वाले पहले शक्ति प्रदर्शन के बाद कांग्रेस का यह कारवां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा की ओर कूच करेगा। पार्टी ने फरवरी के महीने को बेहद महत्वपूर्ण माना है, जिसमें राजधानी लखनऊ और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को मुख्य केंद्र बनाया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार, 1 फरवरी को लखनऊ में एक बड़ी महारैली प्रस्तावित है, जबकि 8 फरवरी को वाराणसी में कांग्रेस अपनी ताकत दिखाएगी। वाराणसी में होने वाली रैली को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह न केवल पूर्वांचल का केंद्र है, बल्कि भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने की कांग्रेस की कोशिशों का बड़ा मंच भी बनेगा।
फरवरी के मध्य से लेकर अप्रैल की शुरुआत तक का पूरा कैलेंडर कांग्रेस ने रैलियों से भर दिया है। 14 फरवरी को अलीगढ़ और 16 फरवरी को सहारनपुर में महारैली का आयोजन किया जाएगा, जिसके जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में पैठ बनाने की कोशिश होगी। इसके बाद 28 फरवरी को रामपुर में रैली प्रस्तावित है। मार्च के महीने में भी कांग्रेस का यह अभियान थमेगा नहीं; 12 मार्च को लखीमपुर खीरी, 22 मार्च को बदायूं और 29 मार्च को बाराबंकी में रैलियां की जाएंगी। वहीं, मार्च के आखिरी दिन यानी 31 मार्च को मुजफ्फरनगर में शक्ति प्रदर्शन के बाद 5 अप्रैल को बागपत में इस श्रृंखला की एक और महत्वपूर्ण महारैली आयोजित की जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के मुताबिक, इन रैलियों का मुख्य एजेंडा जनता के बुनियादी मुद्दों को उठाना और सरकार की विफलताओं को उजागर करना है। कांग्रेस इन मंचों के जरिए युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए अपनी प्रस्तावित योजनाओं का खाका पेश करेगी। पार्टी का मानना है कि सीधे संवाद के जरिए ही वह मतदाता का विश्वास फिर से जीत सकती है। रैलियों के स्थानों का चयन भी काफी सोच-समझकर किया गया है, ताकि जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधा जा सके।
पंचायत चुनावों को विधानसभा चुनाव का ‘सेमीफाइनल’ मानते हुए कांग्रेस इन रैलियों के जरिए ब्लॉक और ग्राम स्तर तक अपने संगठन को सक्रिय कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं, क्योंकि पार्टी को उम्मीद है कि इनके आने से युवाओं में नया जोश भरेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस इन 30 महारैलियों के माध्यम से एक बड़ा विमर्श खड़ा करने में सफल रहती है, तो उत्तर प्रदेश का आगामी चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प और त्रिकोणीय हो सकता है। फिलहाल, शनिवार को सीतापुर में जुटने वाली भीड़ यह तय करेगी कि कांग्रेस की इस नई पारी की शुरुआत कितनी धमाकेदार होती है।