माघ मेला 2026: प्रयागराज के संगम तट पर आस्था का महाकुंभ, मकर संक्रांति पर दोपहर तक 54 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी प्रयागराज आज एक बार फिर ‘मिनी कुंभ’ के रूप में विख्यात माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव, मकर संक्रांति, पर भक्ति के चरम का गवाह बन रही है। त्रिवेणी के पावन संगम पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की रेतीली गोद में आज आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि हर तरफ केवल सिरों का समंदर नजर आ रहा है। माघ मेले के दूसरे प्रमुख स्नान पर्व पर कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। भोर की पहली किरण से पहले ही ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ शुरू हुआ स्नान का यह सिलसिला अविरल जारी है।
प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर आज दोपहर 12 बजे तक 54 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम की पवित्र धारा में डुबकी लगा ली है। मेले में उमड़ी इस भारी भीड़ को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि सूर्य के उत्तरायण होने का शुभ मुहूर्त दिन भर रहने के कारण, शाम तक स्नान करने वालों की यह संख्या 2 करोड़ के जादुई आंकड़े को भी पार कर सकती है।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम: 10 हजार जवानों की मुस्तैदी
माघ मेले की विशालता और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। पुलिस सुपरिटेंडेंट (माघ मेला) नीरज पांडे ने बताया कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और भीड़ के सुचारू प्रबंधन के लिए पूरे मेला क्षेत्र को सुरक्षा के अभूतपूर्व घेरे में रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि 10,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात किए गए हैं। इनमें सादे कपड़ों में तैनात खुफिया इकाइयां, जल पुलिस, और गोताखोरों की टीमें भी शामिल हैं जो घाटों पर निरंतर निगरानी रख रही हैं।
भीड़ और यातायात प्रबंधन के लिए इस वर्ष विशेष रणनीति अपनाई गई है। एसपी नीरज पांडे के अनुसार, प्रयागराज शहर और मेला क्षेत्र में ट्रैफिक को सुव्यवस्थित रखने के लिए 42 अस्थायी पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। इन पार्किंग स्थलों में एक लाख से अधिक वाहनों को खड़ा करने की क्षमता है, जिससे श्रद्धालुओं को अपने वाहनों से घाटों तक पहुंचने में सुगमता हो रही है। साथ ही, ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए कंट्रोल रूम से पल-पल की निगरानी की जा रही है।
उत्तरायण का धार्मिक महत्व और सूर्य उपासना
मकर संक्रांति का पर्व केवल एक ऋतु परिवर्तन नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक संदेश लेकर आता है। स्थानीय पुजारी रविशंकर मिश्रा ने इस दिन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज सूर्य अपनी दक्षिणायन यात्रा समाप्त कर उत्तर दिशा की ओर यात्रा यानी ‘उत्तरायण’ की शुरुआत करते हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों में उत्तरायण के समय को देवताओं का दिन माना जाता है और इस दौरान शरीर त्यागने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पुजारी मिश्रा ने आगे बताया कि आज सूर्योदय से सूर्यास्त तक का पूरा समय अत्यंत शुभ है। इस दिन सूर्य देव की उपासना, दान-पुण्य और गायत्री मंत्र का जाप विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। संगम तट पर आए श्रद्धालु न केवल स्नान कर रहे हैं, बल्कि सूर्य देव को अर्घ्य देकर तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान भी कर रहे हैं। रेती पर बैठे हजारों कल्पवासियों के लिए भी आज का दिन उनकी एक महीने की साधना का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है।
घाटों पर आधुनिक सुविधाएं और महिला श्रद्धालुओं की सुगमता
प्रयागराज प्रशासन ने इस बार संगम के घाटों को अधिक आधुनिक और सुविधाजनक बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। मेला क्षेत्र में दर्जनों नए घाट विकसित किए गए हैं, जहाँ गहराई को लेकर चेतावनी बोर्ड और जाल लगाए गए हैं। स्थानीय निवासी गौरी ओझा ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार महिलाओं के लिए सुविधाएं काफी बेहतर हुई हैं।
गौरी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले घाटों पर महिलाओं और लड़कियों को कपड़े बदलने में काफी असुविधा होती थी, लेकिन अब पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम उपलब्ध हैं। हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया कि श्रद्धालुओं को स्वयं भी जागरूक होना चाहिए और घाटों पर इस्तेमाल किए गए कपड़ों या पूजा सामग्री को प्रवाहित करने के बजाय कूड़ेदानों का उपयोग करना चाहिए। गौरी वाराणसी से एक खास कलश लेकर आई थीं, जिसमें उन्होंने संगम का जल एकत्रित किया, जिसे वे बाद में काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव को अर्पित करेंगी।
‘असाधारण अनुभव’: दूर-दराज से आए भक्तों की भावनाएं
संगम की रेती पर आज केवल उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण और पश्चिम भारत की संस्कृतियों का भी मिलन दिख रहा है। हैदराबाद से अपने परिवार के साथ आए एक वरिष्ठ वकील ने माघ मेले की स्वच्छता और पुलिस व्यवस्था की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि हैदराबाद से यहां आना उनके लिए एक तीर्थ यात्रा से बढ़कर है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वे भगवान से कुछ मांगने नहीं, बल्कि परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और जीवन के लिए आभार व्यक्त करने आए हैं।
इसी तरह, स्थानीय निवासी प्रीति ने मकर संक्रांति पर संगम स्नान के अनुभव को “असाधारण” बताया। उन्होंने कहा कि जब आप बर्फीले जल में डुबकी लगाते हैं, तो वह केवल शरीर की सफाई नहीं, बल्कि आत्मा का शुद्धिकरण होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रयागराज के निवासी होने के नाते उन्हें जो सौभाग्य प्राप्त है, वह दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकता।
निष्कर्ष: श्रद्धा और सुशासन का सफल समन्वय
प्रयागराज माघ मेला 2026 का यह मकर संक्रांति स्नान पर्व इस बात का प्रमाण है कि यदि श्रद्धा के साथ सुशासन का मेल हो, तो करोड़ों की भीड़ को भी सुव्यवस्थित तरीके से संभाला जा सकता है। मेला क्षेत्र में स्वच्छता, पर्याप्त पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और सुगम यातायात के कारण श्रद्धालुओं के चेहरे पर थकान के बजाय भक्ति का तेज नजर आ रहा है।
शाम तक चलने वाले इस स्नान पर्व के लिए प्रशासन ने लाइटों और अलाव की विशेष व्यवस्था की है। संगम की लहरों पर गिरती सूर्य की सुनहरी किरणें और उसमें डुबकी लगाते लाखों हाथ, भारतीय संस्कृति की उस अटूट आस्था को दर्शाते हैं जो सदियों से अजेय बनी हुई है।