October 7, 2026

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अमित शाह पर टिप्पणी मामला: राहुल गांधी को कोर्ट का ‘अंतिम अवसर’, 20 फरवरी को पेश होकर दर्ज कराना होगा बयान

सुलतानपुर/नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। करीब आठ साल पुराने एक मानहानि मामले में उत्तर प्रदेश की सुलतानपुर स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी को अपना बयान दर्ज कराने के लिए ‘अंतिम अवसर’ प्रदान किया है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि आगामी 20 फरवरी को राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।

सोमवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। हालांकि, राहुल गांधी के अधिवक्ताओं ने आश्वासन दिया है कि वे अगली नियत तिथि पर अदालत के समक्ष मौजूद रहेंगे। यह मामला केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आगामी राजनीतिक परिदृश्य में भी कांग्रेस और भाजपा के बीच तल्खी को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

सोमवार की सुनवाई और कोर्ट का कड़ा रुख

सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में सोमवार को जब इस मामले की फाइल खुली, तो उम्मीद की जा रही थी कि राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेंगे। कोर्ट ने पूर्व में ही उनके बयान दर्ज करने के लिए सोमवार की तिथि निर्धारित की थी। हालांकि, राहुल गांधी के उपस्थित न होने पर उनके वकीलों ने स्थगन की मांग की। सुनवाई के दौरान पिछली पेशी के घटनाक्रमों पर भी चर्चा हुई, जिसमें मामले के गवाह रामचंद्र दूबे का बयान पहले ही दर्ज किया जा चुका है और अधिवक्ताओं द्वारा उनसे जिरह की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है।

अदालत ने कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी को अंतिम चेतावनी दी है कि वे 20 फरवरी को हर हाल में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराएं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अंतिम अवसर’ का अर्थ यह है कि यदि वे अगली तारीख पर भी अनुपस्थित रहते हैं, तो कोर्ट उनके खिलाफ कड़े वैधानिक कदम उठा सकता है। राहुल गांधी के अधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि सांसद अपनी संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग हैं और 20 फरवरी को अदालत के समक्ष उपस्थित होंगे।

क्या है आठ साल पुराना यह पूरा विवाद?

यह पूरा प्रकरण साल 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान अपने चरम पर था। बेंगलुरु में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह को लेकर एक टिप्पणी की थी। आरोप है कि राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था और उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया था। भाजपा ने उस समय भी इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और इसे ‘स्तरहीन राजनीति’ करार दिया था।

इस टिप्पणी से आहत होकर सुलतानपुर के स्थानीय भाजपा नेता और पूर्व सहकारी बैंक अध्यक्ष विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का एक परिवाद (Complaint Case) दर्ज कराया था। विजय मिश्रा का तर्क था कि राहुल गांधी के बयान से न केवल पार्टी के शीर्ष नेता की मानहानि हुई है, बल्कि इससे करोड़ों कार्यकर्ताओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंची है। तब से यह मामला सुलतानपुर की अदालत में विचाराधीन है और समय-समय पर इसमें गवाहों के बयान और जिरह की प्रक्रिया चलती रही है।

जमानत पर हैं राहुल गांधी और दर्ज हो चुके हैं प्रारंभिक बयान

राहुल गांधी इस मानहानि मामले में पहले भी सुलतानपुर की अदालत में पेश हो चुके हैं। वे वर्तमान में इस प्रकरण में जमानत पर बाहर हैं। इससे पहले हुई सुनवाइयों में राहुल गांधी ने कोर्ट के समक्ष अपने प्रारंभिक बयान दर्ज कराए थे, जिनमें उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत अब साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उनसे विस्तृत पूछताछ और बयान दर्ज करने का चरण आया है।

एमपी-एमएलए कोर्ट की प्रक्रिया सामान्य अदालतों से थोड़ी तेज होती है, क्योंकि यहां जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से करने का प्रावधान है। विजय मिश्रा के अधिवक्ताओं का कहना है कि वे इस मामले को तार्किक परिणति तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस का विधिक सेल इस मामले को अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक आलोचना के दायरे में देख रहा है।

20 फरवरी की तारीख और आगामी राजनीतिक समीकरण

20 फरवरी को होने वाली राहुल गांधी की पेशी पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं। राहुल गांधी के लिए यह केवल एक अदालती मामला नहीं है, बल्कि अपनी छवि और राजनीति को बचाने की एक और लड़ाई है। इससे पहले ‘मोदी सरनेम’ वाले मानहानि मामले में उनकी सांसदा भी चली गई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया था। ऐसे में सुलतानपुर कोर्ट की यह कार्रवाई कांग्रेस के लिए काफी संवेदनशील है।

भाजपा इस मामले को राहुल गांधी की ‘आदतन गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी’ के तौर पर पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को परेशान करने की साजिश बता रही है। 20 फरवरी को यदि राहुल गांधी कोर्ट पहुंचते हैं, तो सुलतानपुर में भारी सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जमावड़ा देखने को मिल सकता है। कोर्ट के रुख से स्पष्ट है कि अब वह इस पुराने मामले को और अधिक लटकाने के पक्ष में नहीं है और जल्द ही किसी फैसले की ओर बढ़ना चाहता है।

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