महाराष्ट्र में शक्ति का नया केंद्र: सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, बनीं राज्य की पहली महिला डिप्टी सीएम
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक ऐसे अध्याय की शुरुआत हुई जो न केवल भावुक था, बल्कि ऐतिहासिक भी रहा। बारामती के दिग्गज नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद पैदा हुए नेतृत्व के शून्य को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने भर दिया है। शनिवार शाम मुंबई स्थित लोकभवन में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में राज्यपाल ने सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण के साथ ही सुनेत्रा पवार ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है; वे महाराष्ट्र के 64 साल के इतिहास में उपमुख्यमंत्री का पद संभालने वाली पहली महिला बन गई हैं। ‘वहिनी’ के नाम से लोकप्रिय सुनेत्रा पवार अब राज्य की सत्ता में दूसरी सबसे शक्तिशाली कुर्सी पर आसीन हैं।
शपथ ग्रहण समारोह से पहले शनिवार दोपहर महाराष्ट्र विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में विधायकों ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को अपना नया नेता चुना। हालांकि सुनेत्रा वर्तमान में राज्यसभा की सदस्य हैं, लेकिन पार्टी की कमान और सरकार में अजित पवार की विरासत को संभालने के लिए उन्हें सबसे योग्य चेहरा माना गया। अजित पवार के निधन के बाद उपजे संकट के समय में सुनेत्रा ने न केवल परिवार बल्कि पार्टी को भी बिखरने से बचाने की जिम्मेदारी स्वीकार की है।
सुनेत्रा पवार का व्यक्तित्व एक ऐसे राजनेता का है जिन्होंने दशकों तक सत्ता के गलियारों में रहने के बावजूद खुद को सक्रिय चुनावी राजनीति से दूर रखा था। 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में जन्मी सुनेत्रा का पालन-पोषण राजनीति के बीच ही हुआ। उनके पिता बाजीराव पाटिल क्षेत्र के कद्दावर नेता थे, जबकि उनके भाई पदमसिंह बाजीराव पाटिल 1980 के दशक में महाराष्ट्र के गृह मंत्री और राज्य की राजनीति के सबसे ताकतवर चेहरों में गिने जाते थे। सुनेत्रा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एसबी कॉलेज से बी.कॉम की डिग्री हासिल की।
अजित पवार और सुनेत्रा का विवाह 1985 में हुआ था, जो दो शक्तिशाली राजनीतिक घरानों का मिलन था। कहा जाता है कि शरद पवार और पदमसिंह पाटिल की गहरी दोस्ती ने इस रिश्ते की नींव रखी थी। विवाह के बाद पवार परिवार का हिस्सा बनने पर भी सुनेत्रा ने कभी पद की लालसा नहीं की। उन्होंने अपना पूरा ध्यान सामाजिक कार्यों और ग्रामीण विकास पर केंद्रित किया। बारामती के काठेवाड़ी गांव में उनके द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान की गूँज दिल्ली तक सुनाई दी, जिसके परिणामस्वरूप 2006 में इस गांव को ‘निर्मल ग्राम’ का पुरस्कार मिला। इसके अलावा, 2008 में उन्होंने बारामती में जिस हाईटेक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना कराई, वह आज 15 हजार से अधिक लोगों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार दे रहा है।
सुनेत्रा पवार की सक्रिय राजनीति में एंट्री बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई। 2023 में जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विभाजन हुआ, तब वे अपने पति अजित पवार के साथ मजबूती से खड़ी रहीं। उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 2024 का लोकसभा चुनाव था, जब पार्टी ने उन्हें बारामती सीट से उनकी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ मैदान में उतारा। हालांकि उस कांटे की टक्कर में उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने खुद को एक जुझारू नेता के रूप में स्थापित कर लिया। चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने उनकी क्षमताओं पर भरोसा जताया और जून 2024 में उन्हें राज्यसभा भेजा।
28 जनवरी 2026 को एक विमान दुर्घटना में अजित पवार के निधन ने महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था। महायुति सरकार में वित्त मंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार के जाने से सरकार और पार्टी दोनों के सामने स्थिरता का संकट था। ऐसे में शनिवार 31 जनवरी को सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना एक रणनीतिक और भावनात्मक फैसला माना जा रहा है। उनके समर्थकों का मानना है कि सुनेत्रा में वही प्रशासनिक समझ और निर्णय लेने की क्षमता है जो अजित पवार की पहचान थी।
सुनेत्रा पवार के दो बेटे हैं, जिनमें बड़े बेटे पार्थ पवार राजनीति में सक्रिय हैं और छोटे बेटे जय पवार उद्यमिता के क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं। अब सुनेत्रा के सामने न केवल राज्य के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की चुनौती है, बल्कि आगामी चुनावों में पार्टी के कैडर को एकजुट रखने का बड़ा जिम्मा भी है। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘वहिनी’ की इस नई पारी ने राज्य में महिला नेतृत्व के लिए एक नया द्वार खोल दिया है।