बेलडांगा हिंसा की जांच अब एनआईए के हाथों में: साजिश और सांप्रदायिक उकसावे के एंगल से शुरू हुई पड़ताल
मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में पिछले दिनों हुई भीषण हिंसा और तनाव की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आधिकारिक रूप से अपने हाथों में ले ली है। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए एनआईए की एक विशेष टीम बेलडांगा पहुंची, जहां उन्होंने स्थानीय पुलिस से मामले का प्रभार लिया और जांच की कड़ियां जोड़नी शुरू कर दीं। यह कदम इलाके में फैले तनाव की गंभीरता और इसके पीछे किसी गहरी साजिश की आशंका को देखते हुए उठाया गया है। एजेंसी अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि क्या यह हिंसा स्वतःस्फूर्त थी या फिर इसे फर्जी खबरों और सांप्रदायिक उकसावे के जरिए सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था।
बेलडांगा में हिंसा की शुरुआत 16 जनवरी को हुई थी, जब झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की कथित अस्वाभाविक मौत की खबर इस क्षेत्र में पहुंची। देखते ही देखते इस खबर ने एक चिंगारी का काम किया और पूरे इलाके में तनाव फैल गया। स्थिति तब और अधिक विस्फोटक हो गई जब बिहार में इसी क्षेत्र के एक अन्य प्रवासी मजदूर पर हमले की अपुष्ट खबरें सोशल मीडिया के जरिए जंगल की आग की तरह फैल गईं। इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों के भीतर आक्रोश भर दिया, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। हालांकि, शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने इन घटनाओं का इस्तेमाल समुदायों के बीच नफरत फैलाने और भीड़ को हिंसक बनाने के लिए किया।
हिंसा का स्वरूप इतना व्यापक था कि लगभग दो दिनों तक पूरा बेलडांगा क्षेत्र प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर नजर आया। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 पर कब्जा कर लिया और कई घंटों तक आवाजाही ठप रखी। इतना ही नहीं, रेल सेवाओं को भी निशाना बनाया गया और पटरियों पर धरना दिए जाने के कारण महत्वपूर्ण ट्रेनें बीच रास्ते में ही खड़ी रहीं। यातायात बाधित होने से आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और प्रशासन को स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती करनी पड़ी। इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी रोक लगानी पड़ी ताकि भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोका जा सके।
मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय सीमाओं से सटे होने के कारण केंद्र सरकार ने इस हिंसा की जांच एनआईए को सौंपने का निर्णय लिया। शनिवार सुबह जब एनआईए की टीम बेलडांगा थाने पहुंची, तो उन्होंने राज्य पुलिस के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। एजेंसी ने अब तक की गई जांच के सभी दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। विशेष एनआईए अदालत ने भी इस संबंध में सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि जांच से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी बिना किसी देरी के केंद्रीय एजेंसी को उपलब्ध कराई जाए, ताकि जांच की निरंतरता बनी रहे।
एनआईए की जांच का मुख्य केंद्र ‘डिजिटल फुटप्रिंट्स’ और ‘फेक न्यूज’ के नेटवर्क पर है। एजेंसी को संदेह है कि झारखंड और बिहार की घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के पीछे किसी ऐसे गिरोह का हाथ हो सकता है जो बंगाल के सीमावर्ती जिलों में अशांति फैलाना चाहता है। जांच अधिकारी उन सोशल मीडिया हैंडल्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स की पहचान कर रहे हैं, जहां से सबसे पहले भड़काऊ संदेश प्रसारित किए गए थे। इसके साथ ही, एनआईए यह भी देख रही है कि क्या इस हिंसा को भड़काने के लिए किसी बाहरी फंडिंग या संगठित समूह का सहयोग लिया गया था।
राज्य पुलिस ने इस मामले में अब तक त्वरित कार्रवाई करते हुए 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और दंगों में शामिल होने के आरोपों में की गई हैं। एनआईए अब इन गिरफ्तार आरोपियों से नए सिरे से पूछताछ करेगी ताकि साजिश की परतों को उखाड़ा जा सके। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि बेलडांगा में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी और एनआईए की सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है।
एनआईए की एंट्री के बाद अब यह मामला केवल एक स्थानीय दंगे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता का विषय बन गया है। एजेंसी की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि प्रवासी मजदूरों की मौतों का इस्तेमाल किस तरह से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए किया गया। आने वाले दिनों में एनआईए झारखंड और बिहार की उन जगहों का भी दौरा कर सकती है, जहां से इस पूरे विवाद की शुरुआत हुई थी। इस उच्च-स्तरीय जांच का उद्देश्य न केवल दोषियों को सजा दिलाना है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक कड़ा निवारक (Deterrent) भी स्थापित करना है। बेलडांगा के नागरिक अब शांति की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि कानून की एजेंसियां उस नफरत के सौदागरों की तलाश में हैं जिन्होंने एक दुखद घटना को हिंसक उन्माद में बदल दिया।