पाकिस्तान-अफगानिस्तान टकराव फिर चरम पर: इस्तांबुल शांति वार्ता नाकाम, सीमा पर गूंजे गोलियां
इस्लामाबाद, 8 नवंबर: तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच हुई बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता नतीजों के बिना समाप्त हो गई। बातचीत को दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्तों में सुधार की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे “पूरी तरह असफल” करार देते हुए माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। अफगान तालिबान द्वारा सीमा पार आतंकवाद पर लिखित गारंटी देने से इनकार ने वार्ता की दिशा ही बदल दी। नतीजतन, बातचीत टूटने के कुछ ही घंटे बाद सीमा पर फिर गोलीबारी की खबरें आईं। अब विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह विफलता दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर संदेश है और आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान-अफगान रिश्ते और बिगड़ सकते हैं।
इस्तांबुल वार्ता नाकाम, कूटनीतिक उम्मीदें टूटीं
इस्तांबुल में हुई यह वार्ता लंबे समय से दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की एक कोशिश थी। लेकिन पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुलकर कहा कि “अफगान तालिबान आतंकवाद से निपटने को लेकर गंभीर नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। सूत्रों के मुताबिक, वार्ता के दौरान अफगान प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान के “सीमा पार सैन्य अभियानों” पर आपत्ति जताई, जबकि इस्लामाबाद ने TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के हमलों को रोकने के लिए तालिबान से ठोस कदम उठाने की मांग की। मध्यस्थ देशों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन लिखित आश्वासन के मुद्दे पर बातचीत रुक गई। विश्लेषकों का कहना है कि यह विफलता भविष्य में किसी नए वार्ता दौर की संभावना को लगभग खत्म कर सकती है।
चमन बॉर्डर पर फिर हिंसा, दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप
इस्तांबुल में वार्ता जारी रहने के दौरान ही चमन बॉर्डर एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया। दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलीबारी हुई, जिससे सीमा पर तनाव चरम पर पहुंच गया। अफगान सैन्य सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी बलों ने “नागरिक इलाकों को हल्के और भारी हथियारों से निशाना बनाया।” हालांकि अफगान सेना ने कहा कि उन्होंने जवाबी फायरिंग से परहेज किया ताकि वार्ता का सम्मान बना रहे। वहीं पाकिस्तान ने इन दावों को “पूरी तरह निराधार” बताते हुए पलटवार किया कि “फायरिंग की शुरुआत अफगान पक्ष ने की थी।” इस्लामाबाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि उसने संयम बरतते हुए हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। यह ताजा झड़प दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की कोशिशों पर पानी फेरती दिखाई दी।
ड्रोन विवाद और बढ़ती कड़वाहट: रिश्ते फिर खतरे में
तनाव के बीच अब एक और विवाद ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। अफगान मीडिया संस्था TOLO News ने रिपोर्ट दी है कि पाकिस्तान ने अमेरिका को अपनी जमीन से ड्रोन ऑपरेशन चलाने की अनुमति दी है। तालिबान प्रतिनिधियों ने इस पर इस्तांबुल वार्ता के दौरान कड़ी आपत्ति जताई थी, और अब यह मामला दोनों देशों के बीच नई दरार पैदा कर सकता है। पाकिस्तान का तर्क है कि यह सहयोग आतंकवाद से निपटने की दिशा में है, जबकि काबुल इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है। विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान शासन के आने के बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सीमा पार हमले रुकेंगे, लेकिन इसके उलट हालात और गंभीर हो गए हैं। अब जब शांति वार्ता असफल हो चुकी है, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह गतिरोध न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को और खराब करेगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा संतुलन को भी अस्थिर कर सकता है।