क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर 2170 करोड़ का महाघोटाला: ईडी ने दो मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार, 40% रिटर्न का झांसा देकर दुनिया भर के निवेशकों को ठगा
अहमदाबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वैश्विक स्तर पर सक्रिय क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने बिटकनेक्टकॉइन (BitConnect Coin) के माध्यम से हजारों निवेशकों को चूना लगाने और बाद में इसी पैसे की जबरन वसूली करने के मामले में निकुंज प्रवीणभाई और भट्ट संजय कोटडिया को धन शोधन निवारण अधिनियम (PML) के तहत हिरासत में लिया है। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक ईडी कुल 2170 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है।
यह घोटाला केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार पूरी दुनिया से जुड़े हुए थे। आरोपियों ने निवेशकों को रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाया और तकनीकी शब्दों का जाल बुनकर उनसे अरबों रुपये ऐंठ लिए। ईडी की अहमदाबाद इकाई ने सूरत और मुंबई में छापेमारी के बाद इन गिरफ्तारियों को अंजाम दिया है, जिससे क्रिप्टो जगत में हड़कंप मच गया है।
‘ट्रेडिंग बॉट’ का फर्जीवाड़ा: 3700% वार्षिक रिटर्न का झूठा दावा
ईडी की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नवंबर 2016 से जनवरी 2018 के बीच ‘बिटकनेक्ट’ नाम के एक अपंजीकृत संगठन ने एक कथित “ऋण कार्यक्रम” (Lending Program) शुरू किया था। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आरोपियों ने दावा किया कि उनके पास एक विशेष “अस्थिरता सॉफ्टवेयर ट्रेडिंग बॉट” (Volatility Software Trading Bot) है। यह दावा किया गया था कि यह बॉट निवेशकों के पैसे का उपयोग करके बाजार के उतार-चढ़ाव से हर महीने 40 प्रतिशत तक का रिटर्न पैदा करेगा।
अधिक निवेश हासिल करने के लिए बिटकनेक्ट की वेबसाइट पर काल्पनिक और मनगढ़ंत आंकड़े पोस्ट किए गए, जो दैनिक आधार पर 1 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर लगभग 3,700 प्रतिशत का रिटर्न दर्शाते थे। जांच में पता चला कि ऐसा कोई सॉफ्टवेयर अस्तित्व में ही नहीं था। आरोपी निवेशकों के पैसे का उपयोग ट्रेडिंग के लिए करने के बजाय उसे अपने सहयोगियों के डिजिटल वॉलेट में स्थानांतरित कर रहे थे। एक वैश्विक नेटवर्क के जरिए प्रमोटरों को मोटा कमीशन देकर नए निवेशकों को इस दलदल में धकेला जा रहा था।
धोखाधड़ी के भीतर अपराध: अपहरण और बिटकॉइन की जबरन वसूली
इस मामले का दूसरा और अधिक हिंसक पहलू तब सामने आया जब एक अन्य आरोपी शैलेश बाबूलाल भट्ट ने अपने निवेश की वसूली के लिए अपराध का रास्ता चुना। सूरत पुलिस की एफआईआर के अनुसार, शैलेश भट्ट और उसके साथियों ने बिटकनेक्ट के मुख्य प्रमोटर सतीश कुर्जीभाई कुंभानी के दो करीबियों, पीयूष सावलिया और धवल मावानी का अपहरण कर लिया।
अपहर्ताओं ने धवल मावानी को रिहा करने के बदले में भारी फिरौती वसूली। जांच के मुताबिक, उन्होंने डरा-धमका कर 2254 बिटकॉइन, 11,000 लाइटकॉइन और 14.5 करोड़ रुपये नकद वसूले। गिरफ्तार किया गया निकुंज प्रवीणभाई भट्ट इसी अपहरण और जबरन वसूली कांड में शैलेश भट्ट का प्रमुख सहयोगी था। निकुंज को इस अपराध के हिस्से के रूप में 266 बिटकॉइन प्राप्त हुए थे, जिन्हें उसने विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से ठिकाने लगाने की कोशिश की।
छापेमारी और 19 करोड़ की नकद बरामदगी
9 जनवरी, 2026 को ईडी ने इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पांच अलग-अलग स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी के दौरान न केवल डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज मिले, बल्कि जांच एजेंसी ने भारी मात्रा में नकदी और निवेश के दस्तावेज भी बरामद किए। ईडी ने लगभग 19 करोड़ रुपये की नकद संपत्ति, शेयरों और म्यूचुअल फंडों में निवेश और बड़ी मात्रा में क्रिप्टोकरेंसी जब्त की है।
जांच में यह भी सामने आया कि निकुंज भट्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बहुत ही शातिराना तरीका अपनाया था। उसने प्राप्त हुए 246 बिटकॉइन को एथेरियम (Ethereum) और यूएसडीटी (USDT) में बदल दिया ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। इसके बाद, उसने लगभग 20.70 करोड़ रुपये (23 लाख यूएसडीटी) संजय कोटडिया के वॉलेट में ट्रांसफर किए। संजय कोटडिया और निकुंज भट्ट के बीच लेनदेन के इन रिश्तों की पुष्टि डिजिटल उपकरणों के फोरेंसिक विश्लेषण से हुई है।
असहयोग और डिजिटल सबूतों को नष्ट करने का प्रयास
गिरफ्तारी से पहले ईडी ने संजय कोटडिया और निकुंज भट्ट को कई बार पूछताछ के लिए बुलाया और उन्हें अपनी बेगुनाही के सबूत पेश करने का मौका दिया। हालांकि, दोनों आरोपियों ने जांच में सहयोग करने के बजाय टालमटोल भरा रवैया अपनाया। ईडी के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान झूठे और अधूरे बयान देकर जांच की दिशा भटकाने की कोशिश की।
जब्त की गई क्रिप्टोकरेंसी की वर्तमान स्थिति और उसके उपयोग के बारे में पूछे गए सवालों पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। साक्ष्य नष्ट होने और आरोपियों के विदेश भागने के जोखिम को देखते हुए, ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर 20 जनवरी, 2026 को अहमदाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया। अदालत ने साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए दोनों को चार दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
2170 करोड़ की जब्ती और आगे की कार्रवाई
ईडी इस मामले में पहले ही मुख्य आरोपी शैलेश बाबूलाल भट्ट को गिरफ्तार कर चुकी है। अब तक की गई कुल जब्ती और बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई के बाद कुल राशि 2170 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। यह मामला भारत में डिजिटल मुद्रा के नाम पर होने वाली संगठित लूट का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।
जांच एजेंसी अब उन अन्य प्रमोटरों और सहयोगियों की तलाश कर रही है जो इस वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा थे। ईडी का मानना है कि इस घोटाले के तार कई अन्य देशों के क्रिप्टो एक्सचेंजों से भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्तियों की कुर्की होने की संभावना है, क्योंकि ईडी अब उन डिजिटल वॉलेट्स को ट्रैक कर रही है जहाँ निवेशकों का पैसा डंप किया गया था।