अंडर-19 विश्व कप 2026: आज से शुरू होगा क्रिकेट का महाकुंभ, ‘पांच पांडवों’ के दम पर खिताब बचाने उतरेगा भारत
नई दिल्ली: क्रिकेट जगत के भविष्य के सितारों को निखारने वाले सबसे बड़े मंच, आईसीसी अंडर-19 वनडे विश्व कप का आज यानी गुरुवार से शानदार आगाज हो रहा है। दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में भारतीय टीम का सामना अमेरिका से होगा। भारतीय समयानुसार यह मैच दोपहर एक बजे शुरू होगा। गत चैंपियन होने के नाते टीम इंडिया पर न केवल खिताब बचाने का दबाव है, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें भारत के उन युवा खिलाड़ियों पर टिकी हैं जो आने वाले समय में सीनियर टीम के सुपरस्टार बन सकते हैं। इस बार की भारतीय टीम में आक्रमण, स्थिरता, अनुभव और विविधता का एक ऐसा दुर्लभ मिश्रण है, जो किसी भी विपक्षी टीम के लिए खतरे की घंटी है।
भारतीय दल इस बार संतुलित नजर आ रहा है, जहाँ वैभव सूर्यवंशी और अभिज्ञान कुंडू जैसे बल्लेबाज रनों का अंबार लगाने के लिए तैयार हैं, वहीं दीपेश और कनिष्क चौहान जैसे गेंदबाज अपनी धारदार गेंदों से मैच का पासा पलटने का दमखम रखते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं उन पांच प्रमुख खिलाड़ियों के बारे में, जो इस विश्व कप में भारत की सफलता की धुरी साबित होंगे।
वैभव सूर्यवंशी: टीम इंडिया की नई ‘रन-मशीन’

भारतीय बल्लेबाजी क्रम की सबसे मजबूत कड़ी वैभव सूर्यवंशी हैं। पिछले दो वर्षों में घरेलू और जूनियर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने विशेषज्ञों को प्रभावित किया है। वैभव की सबसे बड़ी खूबी उनकी स्थिरता और बड़े मैचों में दबाव सोखने की क्षमता है। 2024 से 2026 के बीच उनके आंकड़ों पर नजर डालें तो वे किसी भी विरोधी के लिए डरावने सपने जैसे हैं। 18 मैचों में उन्होंने 54.05 के शानदार औसत से 973 रन बनाए हैं।
वैभव की बल्लेबाजी शैली में न केवल रन बनाने की भूख है, बल्कि वे पारी को लंबा खींचने में भी माहिर हैं। उनके नाम 3 शतक और 4 अर्धशतक दर्ज हैं, जिसमें 171 रनों की एक विशाल पारी भी शामिल है। वैभव सिर्फ एक आक्रामक सलामी बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि वे मैच की परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालने की कला जानते हैं। यदि भारत को इस विश्व कप में बड़े स्कोर तक पहुंचना है, तो वैभव सूर्यवंशी की शुरुआत टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगी।
अभिज्ञान कुंडू: मध्यक्रम का अटूट विश्वास

अभिज्ञान कुंडू को टीम इंडिया की बल्लेबाजी का ‘बैकबोन’ या रीढ़ की हड्डी माना जा रहा है। मध्यक्रम में खेलते हुए उन्होंने 15 मैचों में 54.88 का असाधारण औसत बनाए रखा है। एक मध्यक्रम बल्लेबाज के लिए 50 से ऊपर का औसत होना उनके खेल के प्रति नियंत्रण को दर्शाता है। कुंडू ने अब तक 494 रन बनाए हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 87 रन (नाबाद) रहा है।
अभिज्ञान की खासियत यह है कि वे ‘क्राइसिस मैन’ के रूप में उभरते हैं। जब टीम शुरुआती विकेट गंवाकर दबाव में होती है, तब कुंडू अपनी संयमित बल्लेबाजी से पारी को संभालते हैं। वहीं, पारी के अंतिम ओवरों में वे तेजी से रन बनाने की क्षमता भी रखते हैं। टीम मैनेजमेंट को उन पर अटूट भरोसा है क्योंकि वे जानते हैं कि स्ट्राइक को कैसे रोटेट करना है और कब बड़े शॉट्स के लिए जाना है।
आयुष म्हात्रे: निडर कप्तान और रणनीतिकार
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टीम की कप्तानी संभाल रहे आयुष म्हात्रे को भारतीय अंडर-19 टीम का ‘आर्किटेक्ट’ कहा जाता है। म्हात्रे एक ऐसे बल्लेबाज हैं जो मैदान पर पूरी तरह से बेखौफ होकर खेलते हैं, लेकिन उनके शॉट्स में गजब का कंट्रोल होता है। वे जानते हैं कि टीम को कब आक्रामकता की जरूरत है और कब शांति से खेल को आगे बढ़ाना है। हालांकि उनके व्यक्तिगत औसत के आंकड़े अभी निर्माण की प्रक्रिया में हैं, लेकिन उनकी नेतृत्व क्षमता और साथी खिलाड़ियों को शांत रखने का कौशल अमूल्य है।
वैभव और आयुष की ओपनिंग जोड़ी इस टूर्नामेंट की सबसे खतरनाक जोड़ियों में से एक मानी जा रही है। एक कप्तान के तौर पर म्हात्रे की भूमिका केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि मैदान पर उनकी फील्ड प्लेसमेंट और गेंदबाजों का रोटेशन भारत की जीत की कुंजी साबित होगा। वे खेल की नब्ज पहचानते हैं और जोखिम लेने से पीछे नहीं हटते।
कनिष्क चौहान: हरफनमौला खेल से संतुलन बनाने वाले खिलाड़ी

आधुनिक क्रिकेट में एक बेहतरीन ऑलराउंडर की भूमिका सबसे अहम होती है और कनिष्क चौहान भारत के लिए वही काम कर रहे हैं। 2025-26 के सत्र में उन्होंने बल्ले से 258 रन जोड़े हैं और गेंद से 15 महत्वपूर्ण विकेट भी चटकाए हैं। कनिष्क की सबसे प्रभावशाली बात उनकी इकोनॉमी रेट है, जो 4.51 की रही है। अंडर-19 जैसे आक्रामक फॉर्मेट में साढ़े चार की इकोनॉमी से गेंदबाजी करना विपक्षी बल्लेबाजों को बांधे रखने के बराबर है।
कनिष्क टीम को वह ‘बैलेंस’ प्रदान करते हैं जिसकी जरूरत हर कप्तान को होती है। वे छठे या सातवें नंबर पर आकर मैच फिनिश करने की क्षमता रखते हैं और साथ ही बीच के ओवरों में विकेट निकालकर साझेदारी तोड़ने में भी माहिर हैं। उनका ‘दोहरी भूमिका’ निभाने का हुनर टीम इंडिया को प्लेइंग इलेवन के चयन में अतिरिक्त विकल्प प्रदान करता है।
डी. दीपेश: पावरप्ले के घातक स्ट्राइक बॉलर

गेंदबाजी विभाग में डी. दीपेश एक ऐसा नाम है जिसने हाल ही में संपन्न हुए एशिया कप में अपनी धाक जमाई थी। विशेष रूप से पाकिस्तान के खिलाफ उनकी ‘स्पेल’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं, जहाँ उन्होंने 3 विकेट लेकर विपक्षी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी। दीपेश पावरप्ले के स्पेशलिस्ट माने जाते हैं क्योंकि वे शुरुआती ओवरों में गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रखते हैं।
पिछले दो साल में 10 मैचों में 15 विकेट लेने वाले दीपेश का गेंदबाजी औसत 27.86 है। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 16 रन देकर 3 विकेट है। दीपेश की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि विपक्षी टीम को शुरुआत में ही झटके लगें, जिससे भारतीय स्पिनरों को बीच के ओवरों में हावी होने का मौका मिल सके। उनकी गति और उछाल का मिश्रण दक्षिण अफ्रीकी पिचों पर और भी ज्यादा घातक साबित हो सकता है।
विश्व कप के लिए भारतीय चुनौती और टीम का संकल्प
भारतीय अंडर-19 टीम का इतिहास विश्व कप में बेहद शानदार रहा है। मोहम्मद कैफ, विराट कोहली, पृथ्वी शॉ और यश ढुल जैसे कप्तानों ने भारत को विश्व चैंपियन बनाया है। इस बार आयुष म्हात्रे की अगुवाई वाली टीम पर उस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। टीम में इन पांच प्रमुख नामों के अलावा आरएस अम्ब्रिश, मोहम्मद एनाान और विहान मल्होत्रा जैसे प्रतिभावान खिलाड़ी भी शामिल हैं जो किसी भी दिन मैच विजेता साबित हो सकते हैं।
आज अमेरिका के खिलाफ होने वाला मुकाबला भारत के लिए अपनी लय हासिल करने का सुनहरा अवसर है। हालांकि अमेरिका की टीम को कम आंकना भूल होगी, लेकिन भारतीय दल की गहराई और अनुभव उन्हें इस मैच में स्पष्ट रूप से दावेदार बनाता है। भारतीय क्रिकेट प्रेमी एक बार फिर अपने इन युवा सितारों से उसी गौरव की उम्मीद कर रहे हैं जो भारतीय क्रिकेट की पहचान रही है।
2026 अंडर-19 विश्व कप के लिए भारत का पूरा स्क्वॉड
भारतीय टीम का नेतृत्व आयुष म्हात्रे कर रहे हैं। टीम में प्रतिभावान खिलाड़ियों की पूरी फौज है जिसमें आरएस अम्ब्रिश, कनिष्क चौहान, डी. दीपेश, मोहम्मद एनाान, एरॉन जॉर्ज, अभिग्यान कुंडू, किशन कुमार सिंह, विहान मल्होत्रा, उद्धव मोहन, हेनिल पटेल, खिलान ए. पटेल, हर्वंश सिंह, वैभव सूर्यवंशी और वेदांत त्रिवेदी शामिल हैं। इन 15 खिलाड़ियों के कंधों पर भारत को छठी बार अंडर-19 विश्व कप का ताज दिलाने की जिम्मेदारी है।
आज दोपहर एक बजे जब मैदान पर राष्ट्रगान गूंजेगा, तो करोड़ों भारतीयों की दुआएं इन युवा जांबाज खिलाड़ियों के साथ होंगी। यह केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि इन युवाओं के लिए टीम इंडिया के मुख्य द्वार तक पहुंचने का सबसे बड़ा रास्ता है।