विश्व शिक्षक दिवस पर KMCLU में मूट कोर्ट प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन सत्र आयोजित
लखनऊ, 7 अक्टूबर 2026: विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (KMCLU), लखनऊ के विधि अध्ययन संकाय की ओर से डॉ. बी.आर. आंबेडकर मेमोरियल मूट कोर्ट हॉल में मूट कोर्ट प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विधि शिक्षा के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ना और उन्हें कानूनी शोध, मेमोरियल लेखन, मौखिक बहस तथा न्यायालयीन कौशल की बारीकियों से परिचित कराना रहा। सत्र के दौरान विद्यार्थियों को मूट कोर्ट की प्रक्रिया, लीगल रिसर्च, मेमोरियल ड्राफ्टिंग और ओरल एडवोकेसी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को दिए वकालत के टिप्स
एमिटी लॉ स्कूल, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ के सहायक आचार्य डॉ. सृजन मिश्रा ने विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों को मूट कोर्ट की प्रक्रिया और प्रभावी वकालत के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद भी किया और उनके सवालों के जवाब देते हुए कानूनी तर्क प्रस्तुत करने तथा अदालत में प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
व्यावहारिक प्रशिक्षण से बढ़ता है आत्मविश्वास
इस अवसर पर विधि अध्ययन संकाय के डीन डॉ. पीयूष कुमार त्रिवेदी ने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक कानूनी परिस्थितियों से जोड़ने में मदद करता है। ऐसे प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की पेशेवर दक्षता के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास का भी विकास होता है।
वहीं, कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि विधि शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण का विशेष महत्व है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को न्यायालयीन कार्यप्रणाली और भविष्य की पेशेवर चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षक और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. राजकुमार, डॉ. दीक्षा मिश्रा, श्री भानु प्रताप सिंह, डॉ. हेमा पाठक और श्रीमती जैनब इफ्तिखार सहित विधि अध्ययन संकाय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय मूट कोर्ट समिति के समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार वरुण ने किया।
सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को कानूनी शोध करने, प्रभावी मेमोरियल तैयार करने, तर्क प्रस्तुत करने और न्यायालयीन कौशल को व्यवहार में समझने का अवसर मिला। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह आयोजन कौशल-आधारित, गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थी-केंद्रित विधि शिक्षा की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
