• February 11, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लगाई फटकार: ‘चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा न लें’, बिहार चुनाव रद्द करने की याचिका खारिज

नई दिल्ली, 6 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी की उस याचिका पर कड़ी फटकार लगाई है, जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों को रद्द करने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका को सुनने से इनकार कर दिया और पार्टी को पटना हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।
पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “जब जनता आपको पूरी तरह नकार देती है, तो क्या आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल कर सकते हैं? चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा लेकर लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी राज्य स्तर पर चुनाव रद्द करने का कोई सामान्य निर्देश जारी नहीं किया जा सकता, खासकर एक हार चुकी राजनीतिक पार्टी की याचिका पर।
याचिका में क्या था आरोप?
जन सुराज पार्टी ने याचिका में आरोप लगाया था कि बिहार सरकार ने चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मतदान से ठीक पहले महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए। पार्टी का दावा था कि इससे लगभग 25-35 लाख महिला मतदाताओं को प्रभावित किया गया, जो भ्रष्ट आचरण (corrupt practice) के बराबर है और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। पार्टी ने चुनाव रद्द कर नए मतदान की मांग की थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने पहले ही इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘फ्रीबीज’ (मुफ्त सुविधाओं) के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे जांचा जाएगा, लेकिन हारने वाली पार्टी की याचिका पर नहीं। कोर्ट ने कहा, “यह मुद्दा एक राज्य विशेष से जुड़ा है, इसलिए पटना हाईकोर्ट में जाएं।
प्रशांत किशोर की पार्टी का प्रदर्शन
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी को कोई सीट नहीं मिली और उसका वोट शेयर भी नगण्य रहा। चुनाव नतीजों के बाद प्रशांत किशोर ने कई बार ‘चुनावी गड़बड़ी’ और ‘मतदाताओं को रिश्वत’ का आरोप लगाया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को अदालत में चुनौती देने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
यह फैसला ‘फ्रीबीज’ और चुनावी प्रक्रिया में सरकारी योजनाओं के इस्तेमाल पर बहस को और तेज कर सकता है। कोर्ट ने याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए पार्टी को हाईकोर्ट का रुख करने को कहा।
Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *