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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और अगली सुनवाई तक उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी है।

कोर्ट का आदेश और राहतशुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर विचार किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया, लेकिन तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अगली सुनवाई (मार्च के तीसरे हफ्ते तक संभावित) तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस फैसले के बाद अदालत में मौजूद समर्थकों ने तालियां बजाईं।
मामला क्या है?
यह मामला POCSO एक्ट  के तहत दर्ज है। 21 फरवरी 2026 को प्रयागराज के झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। आरोप है कि दो व्यक्तियों (जिनमें एक नाबालिग शामिल है) के साथ यौन दुर्व्यवहार किया गया। यह घटनाएं कथित तौर पर 2025 के माघ मेले और 2026 के माघ मेले के दौरान गुरुकुल या धार्मिक शिविरों में हुईं। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य) ने कोर्ट में आवेदन देकर FIR दर्ज कराने का निर्देश प्राप्त किया था।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और इसे झूठी साजिश तथा अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित बताए गए बच्चे कभी उनके गुरुकुल में आए ही नहीं।
स्वामी का बयान:
नार्को टेस्ट के लिए तैयारमामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कहा, “यदि नार्को टेस्ट से सच्चाई सामने आ सकती है तो यह अवश्य किया जाना चाहिए। सच उजागर करने के लिए जो भी तरीके उपलब्ध हैं, उन्हें अपनाया जाना चाहिए।”उन्होंने आगे कहा, “झूठ ज्यादा वक्त तक नहीं टिकता। जिन्होंने भी झूठी कहानी गढ़ी है, वे बेनकाब हो रहे हैं। जैसे-जैसे लोगों को इस मनगढ़ंत मामले की जानकारी होगी, सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी। जो बच्चा कभी हमारे पास आया ही नहीं, उसे हमारे नाम से जोड़ना आसान नहीं है।”यह मामला धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, और हाई कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक जांच जारी रहेगी।

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