किसान दो तालाबों के पानी से सींच रहे 500 एकड़ धान फसल

वर्षा की कमी से खेतों में धान की फसल सूखने लगी है। फसल बचाने किसान तरह-तरह के जतन कर रहे हैं। तालाब और नाला-डबरी का पानी किराए के डीजल पंप और पाइप से खींचकर फसल को सिंचित करने में लगे हैं। जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही है। ग्राम डाही में गांव के चार तालाबों में से दो तालाब के पानी को खाली करके 500 एकड़ से अधिक खेतों की सिंचाई कर रहे हैं।

भखारा तहसील के अंतर्गत ग्राम डाही में धान की फसल का बुरा हाल है। बोर से सिंचाई करने वाले किसानों की ही फसल ठीक है। डाही क्षेत्र के अधिकांश किसान मानसून पर आधारित या नहर पानी के भरोसे खेती करते हैं। खेतों में धान फसल को सूखते देखकर किसान काफी चिंतित है हैं। फसल के लिए पानी की व्यवस्था करने पूरी ताकत लगा दिया है। भखारा तहसील के ग्राम डाही में पुरी के नहर नाली से लगे अंतिम छोर पर डाही में खेतों की फसल पानी के बिना सूखने लगी है। ग्राम के किसान गांव की तालाब को फोड़कर और नाला-डबरी से पानी खींचकर फसल बचाने में लगे हैं। ग्राम पंचायत डाही के किसान साहूकार कतलाम ने बताया कि 50 डिसमिल खेत की फसल सूख रही है। जिसे बचाने नाला की पानी से सिंचाई कर रहा है। 300 रुपये प्रति घंटा के किराए पर डीजल पंप और 100 रुपये प्रतिदिन के किराए पर पाइप लेकर खेतों तक पानी पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि खेत को पूरी तरह सिंचित करने में कम से कम छह से सात घंटा मोटर पंप चलाना होगा। नाला से खेत तक पानी लाने 600 फिट लंबा पाइप लगाना पड़ा है। नाला-डबरी के पानी से ही विजय ठाकुर सहित अन्य किसानों ने सिंचाई कर अपनी फसल को सूखने से बचाया।

कुछ घंटो में ग्राम डाही का शीतला व बड़े तालाब खाली

भखारा तहसील के ग्राम डाही के शीतला व बड़े तालाब से कुछ घंटों में ही पानी खाली हो गया। गांव से लगा शीतला व बड़े तालाब में वर्षा का पानी जमा था। इस तालाब से पानी लेकर अपनी फसल बचाने गांव के किसानों मे होड़ मच गई। तालाब का पानी फोड़कर खेत तक ले जाने 5 – 6 मजदूर लगाए गए हैं। तालाब में निस्तारी के लिए पानी बचा है। जिसे पूरे गांववासी निस्तारी करते हैं।

सिंचाई खर्च बढ़ने से लागत बढ़ने लगी

किसान फसल बचाने इधर-उधर से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। कोई सिंचाई पंप वाले किसान से पानी खरीद रहा है तो कोई आसपास के तालाब और नाला-डबरी में डीजल पंप लगाकर अपनी खींचकर धान फसल की सिंचाई करने में लगा है। डाही सहित आसपास के गांवों में एक बार की सिंचाई के किसानों को सिंचाई सुविधा वाले किसानों को 500 से एक हजार रुपये तक चुकाना पड़ रहा है। डीजल पंप 300 रुपये घंटे और लंबी पाइप 100 प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर लेकर पानी खींचना पड़ रहा है। सिंचाई पानी की व्यवस्था में खर्च के कारण खरीफ फसल की लागत बढ़ने लगी है।

सर्वसम्मति से निर्णय करके तालाब से छोड़ा गया पानी

ग्राम विकास समिति अध्यक्ष हरिचंद यादव, उपाध्यक्ष भोलाराम निषाद, कोषाध्यक्ष राकेश चंदे, सचिव खिलेंद्र सिन्हा ने बताया कि गांव में सर्वसम्मति से निर्णय करके तालाब के पानी से खेत की सिंचाई करा रहे हैं। गांव में चार तालाब हैं, जिनमें से दो तालाब शीतला व बड़े तालाब का पानी खेतों के लिए छोड़ा गया है।

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