• February 26, 2026

प्रयागराज माघ मेला: साधु-संतों में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, 150 से अधिक ने मांगी व्यक्तिगत सुरक्षा और गनर

प्रयागराज: संगम की रेती पर अध्यात्म और आस्था के महापर्व ‘माघ मेला’ की शुरुआत के साथ ही सुरक्षा को लेकर एक अनोखी स्थिति पैदा हो गई है। संसार, परिवार और मोह-माया का त्याग कर संन्यास की राह पर चलने वाले साधु-संतों ने मेले में खुद को असुरक्षित बताया है। माघ मेले में प्रवास कर रहे 150 से अधिक साधु-संतों ने अपनी जान का खतरा बताते हुए मेला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को पत्र लिखकर व्यक्तिगत सुरक्षा के रूप में ‘गनर’ उपलब्ध कराने की मांग की है। संन्यासियों द्वारा इस तरह सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद मेला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है और खुफिया विभाग के जरिए वास्तविक खतरों का आकलन किया जा रहा है।

खुफिया इकाई (LIU) कर रही है खतरों का गोपनीय सत्यापन

साधु-संतों द्वारा सामूहिक रूप से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद मेला पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है। एसपी माघ मेला, नीरज कुमार पांडेय ने जानकारी दी कि प्राप्त हुए सभी आवेदनों में बताए गए कारणों का सत्यापन बेहद गोपनीय तरीके से कराया जा रहा है। यह जिम्मेदारी स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) को सौंपी गई है। एलआईयू के अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि वास्तव में किन साधु-संतों को जान का खतरा है और किन मामलों में सुरक्षा की मांग केवल प्रतिष्ठा या अन्य कारणों से की गई है।

प्रशासन का कहना है कि एलआईयू की रिपोर्ट के आधार पर ही सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। अब तक प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर लगभग 90 साधु-संतों को व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड (गनर) प्रदान किए जा चुके हैं। शेष आवेदनों पर अभी जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार सुरक्षा आवंटित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, मेला क्षेत्र में स्थापित 65 से अधिक बड़े शिविरों की सामान्य सुरक्षा के लिए प्रशासन ने पहले से ही होमगार्ड तैनात कर रखे हैं ताकि श्रद्धालुओं और संतों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

अभेद्य सुरक्षा घेरे में माघ मेला: हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती

माघ मेले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मेला क्षेत्र को एक किले में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल का विवरण किसी बड़े युद्ध स्तर की तैयारी जैसा है। प्रशासन ने मेले की व्यवस्था संभालने के लिए सात अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) और 14 क्षेत्राधिकारी (CO) नियुक्त किए हैं। इनके नेतृत्व में 29 इंस्पेक्टर, 221 पुरुष दरोगा और 15 महिला दरोगा दिन-रात ड्यूटी पर तैनात हैं।

सुरक्षा की सबसे अहम कड़ी के रूप में 1593 पुरुष सिपाही और 136 महिला सिपाही मेला क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं। केवल जिला पुलिस ही नहीं, बल्कि केंद्रीय और राज्य बलों की भी बड़ी मौजूदगी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएसी (PAC) की सात कंपनियां और बाढ़ राहत के लिए पीएसी की पांच कंपनियां तैनात की गई हैं। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें, एसडीआरएफ की एक टीम और आरएएफ (RAF) की कुल छह कंपनियां (दो अस्थायी और चार पूरी अवधि के लिए) मुस्तैद हैं। आंतरिक सुरक्षा और आतंकी खतरों से निपटने के लिए छह बीडीडीएस (BDDS) टीमें और दो एटीएस (ATS) चेक टीमें भी लगातार सक्रिय हैं।

सीसीटीवी और वॉच टावरों से हो रही है तीसरी आंख की निगरानी

तकनीकी सुरक्षा के मामले में भी इस बार का माघ मेला काफी उन्नत है। संगम क्षेत्र से लेकर पूरे प्रयागराज शहर तक कुल 1552 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 400 कैमरे विशेष रूप से केवल मेला क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए हैं। इन सभी कैमरों की निगरानी के लिए एक ‘सेंट्रल कंट्रोल रूम’ बनाया गया है, जहां विशेषज्ञ हर संदिग्ध गतिविधि को ट्रैक करते हैं।

इसके साथ ही, मेला क्षेत्र में 20 ऊंचे वॉच टावर बनाए गए हैं, जहां से सुरक्षाकर्मी दूरबीन के जरिए भीड़ और घाटों की निगरानी करते हैं। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 16 महिला हेल्प डेस्क और डिजिटल अपराधों को रोकने के लिए 17 साइबर हेल्प डेस्क भी काम कर रही हैं। अग्नि सुरक्षा के लिए 761 फायरकर्मी और दमकल की गाड़ियां विभिन्न सेक्टरों में तैनात की गई हैं।

यातायात प्रबंधन और सुचारू आवागमन की चुनौती

लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यातायात व्यवस्था एक बड़ी चुनौती होती है। इसे सुव्यवस्थित करने के लिए चार यातायात इंस्पेक्टर, 38 दरोगा और 381 मुख्य आरक्षियों की फौज लगाई गई है। इनका सहयोग करने के लिए 1088 होमगार्ड और 304 पीआरडी (PRD) जवान तैनात किए गए हैं जो पार्किंग से लेकर मार्गों के डायवर्जन तक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

एसपी माघ मेला नीरज कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण मेला संपन्न कराना है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, लेकिन संसाधनों का आवंटन पूरी तरह से वास्तविक खतरे और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाएगा। वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी कल्पवासी व संत शांतिपूर्वक अपना प्रवास कर रहे हैं।

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