बिहार में शराबबंदी पर सियासी घमासान: JDU-RJD आमने-सामने, चंदे को लेकर बढ़ा विवाद
Bihar की राजनीति में शराबबंदी एक बार फिर बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है। Janata Dal (United) (JDU) और Rashtriya Janata Dal (RJD) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बार विवाद का केंद्र शराब कंपनियों से मिले कथित चुनावी चंदे को लेकर है।
तेजस्वी यादव के बयान से शुरू हुआ विवाद
नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने हाल ही में राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार के लिए शराबबंदी कानून को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि यह कानून पूरी तरह विफल हो चुका है और इसके कारण राज्य में अवैध गतिविधियों का समानांतर तंत्र खड़ा हो गया है।
JDU का पलटवार
तेजस्वी यादव के इस बयान पर JDU ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Umesh Singh Kushwaha ने आरोप लगाया कि RJD शराब कंपनियों से चंदा लेती है, इसलिए वह शराबबंदी पर सवाल उठा रही है।
JDU के अनुसार, जुलाई 2023 से जनवरी 2024 के बीच RJD को शराब कंपनियों से करीब 46.64 करोड़ रुपये का चंदा मिला। पार्टी का कहना है कि ऐसे में RJD की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शराबबंदी पर JDU का पक्ष
JDU का कहना है कि वर्ष 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी के बाद राज्य में कई सकारात्मक सामाजिक बदलाव देखने को मिले हैं। पार्टी ने दावा किया कि विभिन्न सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोगों ने इस कानून के पक्ष में राय दी है।
RJD पर सवाल और राजनीतिक आरोप
JDU के मुख्य प्रवक्ता Neeraj Kumar ने कहा कि शराबबंदी पर सवाल उठाने से पहले RJD को अपने नेताओं और परिवार के भीतर इस मुद्दे पर रायशुमारी करनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने चुनावी चंदे को लेकर भी जवाब देने की मांग की।
बढ़ता सियासी तनाव
शराबबंदी को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां JDU इसे जनहित से जुड़ा अहम फैसला बता रही है, वहीं RJD इसकी प्रभावशीलता पर लगातार सवाल उठा रही है। बिहार की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में और गर्मा सकता है, खासकर चुनावी माहौल के बीच यह बहस और तेज होने की संभावना है।