ईरान संकट पर पीएम मोदी का बयान: ऊर्जा संकट में भारत की रणनीति और कूटनीति ने दिखाई ताकत, अफवाह फैलाने वालों पर साधा निशाना
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस स्थिति ने 21वीं सदी का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर दिया, लेकिन भारत ने अपनी रणनीति, कूटनीति और समय रहते लिए गए फैसलों से इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, लेकिन भारत ने संकट का सही आकलन कर प्रभावी रणनीति अपनाई, जिससे देश में बड़े पैमाने पर ईंधन की कमी नहीं होने दी गई।
भारत की रणनीति और कूटनीति पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि संकट के दौरान भारत ने संसाधनों का संतुलित उपयोग किया और अपनी डिप्लोमैटिक ताकत का बेहतर इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि युद्ध के समय भारत की वैश्विक मित्रता और कूटनीतिक संबंध बेहद उपयोगी साबित हुए। उन्होंने बताया कि संकट से पहले भारत लगभग 25-26 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन हालात बदलने के बाद यह संख्या बढ़कर 40 से अधिक देशों तक पहुंच गई। इससे भारत की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनी रही।
अफवाह फैलाने वालों पर निशाना
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान कुछ लोग अफवाहें और आशंकाएं फैलाने में लगे हुए थे, लेकिन उनके प्रयास सफल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि देश के दूर-दराज इलाकों में कुछ समय के लिए आपूर्ति संबंधी चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन कहीं भी गंभीर ईंधन संकट पैदा नहीं होने दिया गया।
तेल कंपनियों के घाटे पर सरकार का कदम
पीएम मोदी ने बताया कि अप्रैल से जून के बीच तेल कंपनियों को करीब 75,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जिसे सरकार ने अपने खजाने से पूरा करने का फैसला लिया। इसके साथ ही प्रति लीटर डीजल और पेट्रोल पर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर जनता पर बोझ कम किया गया।
आत्मनिर्भरता और विकास पर जोर
राजस्थान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति आत्मनिर्भरता पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल परियोजनाओं का शिलान्यास नहीं करती, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए भी लगातार काम करती है। उन्होंने राजस्थान की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की दिशा में देश को नई प्रेरणा दी है।