October 4, 2026

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पद्म विभूषण पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का निधन, 70 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

रायपुर: छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक कलाकार और पंडवानी गायन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से लोककला जगत में शोक की लहर है। उन्होंने अपने लंबे कलात्मक सफर के दौरान पंडवानी को नई पहचान दिलाई और भारतीय लोक परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान

डॉ. तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था। पारधी अनुसूचित जनजाति से आने वाली तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली मंच प्रस्तुति और जीवंत कथा-वाचन शैली के दम पर पंडवानी गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला है, जिसमें महाभारत की कथाओं को गायन, संगीत और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। उनकी प्रस्तुतियों ने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी दर्शकों को प्रभावित किया।

पुरुषों के वर्चस्व वाली शैली को अपनाने वाली पहली महिला

जब तीजन बाई ने अपने करियर की शुरुआत की, उस समय महिलाएं पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करती थीं। उन्होंने इस परंपरा को तोड़ते हुए पुरुष कलाकारों की कापालिक शैली को अपनाया और खड़े होकर नाटकीय अंदाज में प्रस्तुति देने वाली पहली महिला कलाकार बनीं। उन्होंने मात्र 13 वर्ष की उम्र में मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था और जल्द ही अपनी अनूठी शैली के कारण देशभर में पहचान बना ली।

नाना से मिली कला की प्रेरणा

बचपन में अपने नाना ब्रजलाल पारधी से महाभारत की कहानियां सुनते-सुनते उन्हें पंडवानी से गहरा लगाव हो गया। बाद में उन्होंने उमेद सिंह देशमुख से इस लोककला का अनौपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया और इसे अपना जीवन समर्पित कर दिया।

कई प्रतिष्ठित सम्मानों से हुईं सम्मानित

भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा। उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा बिलासपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की मानद उपाधि भी प्रदान की थी।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी सशक्त आवाज और अनूठी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को जीवंत बनाया तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। राष्ट्रपति ने उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने उनके निधन को कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए शोक संतप्त परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। उनकी कला, संघर्ष और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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