• June 10, 2026

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों की राह आसान

भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी उम्मीदवार Meenakshi Natarajan का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस इस फैसले को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बता रही है, जबकि भाजपा इसे नियमों के अनुसार हुई कार्रवाई करार दे रही है।

नामांकन रद्द होने से कुछ घंटे पहले तक कांग्रेस अपने विधायकों को कथित क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच विशेष विमान से बेंगलुरु भेजने की तैयारी कर चुकी थी। करीब 40 विधायक और उनके परिजन भोपाल एयरपोर्ट पहुंच चुके थे। पार्टी को आशंका थी कि भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने के बाद चुनाव में समीकरण बदल सकते हैं।

कैसे रद्द हुआ नामांकन?

विवाद की शुरुआत भाजपा की शिकायत से हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल किए गए फॉर्म-26 में एक कथित लंबित मामले की जानकारी नहीं दी।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि हैदराबाद की एक अदालत में लंबित निजी शिकायत में मीनाक्षी नटराजन आरोपी के रूप में नामित हैं।

रिटर्निंग अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद कहा कि संबंधित मामले में अदालत द्वारा संज्ञान लिया गया था और उम्मीदवार की ओर से जवाब भी दाखिल किया गया था। इसी आधार पर हलफनामे को अधूरा बताते हुए नामांकन निरस्त कर दिया गया।

कांग्रेस और भाजपा के तर्क

कांग्रेस का कहना है कि जिस मामले का हवाला दिया जा रहा है, वह एक निजी शिकायत से जुड़ा हुआ है और उसे लंबित आपराधिक मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश अधिवक्ता अजय गुप्ता का तर्क है कि नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत जारी किया गया था, जो किसी निजी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले प्रस्तावित आरोपी को सुनवाई का अवसर देने से संबंधित है।

कांग्रेस का दावा है कि अदालत ने अभी अंतिम रूप से संज्ञान नहीं लिया था और न ही इसे ऐसा मामला माना जा सकता था जिसे चुनावी हलफनामे में अनिवार्य रूप से घोषित किया जाए।

वहीं भाजपा का कहना है कि जब अदालत में प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और उम्मीदवार ने जवाब दाखिल किया था, तब इसकी जानकारी फॉर्म-26 में देना आवश्यक था।

क्या बीजेपी की तीसरी सीट पक्की हो गई?

मध्य प्रदेश विधानसभा में संख्या बल के आधार पर पहले यह माना जा रहा था कि भाजपा दो और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है। लेकिन भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में Mahesh Kewat को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया।

अब यदि कांग्रेस को चुनाव आयोग या अदालत से राहत नहीं मिलती है और नामांकन बहाल नहीं होता, तो भाजपा उम्मीदवार Tarun Chugh, Rajneesh Agrawal और महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना बढ़ सकती है।

कांग्रेस की रणनीति पर उठे सवाल

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस की कानूनी तैयारी और रणनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी का ध्यान विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग रोकने पर अधिक केंद्रित था, जबकि नामांकन से जुड़े कानूनी पहलुओं पर पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती गई।

हालांकि कांग्रेस नेताओं ने किसी भी प्रकार की चूक से इनकार किया है और स्पष्ट किया है कि पार्टी इस फैसले को चुनाव आयोग तथा न्यायालय में चुनौती देगी।

आगे क्या?

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 11 जून दोपहर 3 बजे तक है। कांग्रेस की नजर अब कानूनी विकल्पों पर टिकी हुई है। यदि उसे समय रहते राहत नहीं मिलती, तो मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है और भाजपा को अप्रत्याशित राजनीतिक बढ़त मिल सकती है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *