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प्रिंस मौत मामले में खान सर पर FIR को लेकर पेच, कोर्ट जाने की तैयारी में रोशन आनंद

बिहार के चर्चित प्रिंस मौत मामले में खान सर और रोशन आनंद के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। रोशन आनंद द्वारा खान सर के खिलाफ पटना के कोतवाली थाने में शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं होने से मामला कानूनी और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रोशन आनंद ने आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज कराने के 48 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने पहले चेतावनी दी थी कि यदि निर्धारित समय तक FIR दर्ज नहीं होती है, तो वे अदालत का रुख करेंगे।

FIR दर्ज होने में क्या है कानूनी अड़चन?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामला नेपाल में हुई एक घटना से जुड़ा है, इसलिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में इस पर FIR दर्ज की जा सकती है या नहीं। इसी कारण पुलिस कानूनी राय लेने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि नेपाल पुलिस की शुरुआती जांच में मौत के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट आपराधिक साजिश सामने नहीं आई है। ऐसे में बिना पर्याप्त आधार के मामला दर्ज करना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

क्या बिहार में दर्ज हो सकती है FIR?

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी मामले में आपराधिक षड्यंत्र के ठोस संकेत या सबूत मिलते हैं और साजिश किसी अन्य स्थान पर रची गई हो, तो स्थानीय पुलिस मामला दर्ज कर सकती है। हालांकि इसके लिए प्रारंभिक स्तर पर पर्याप्त आधार होना आवश्यक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि पुलिस FIR दर्ज नहीं करती है तो शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। इसके बाद भी राहत नहीं मिलने पर उच्च न्यायालय जाने का विकल्प खुला रहता है।

खान सर पक्ष की प्रतिक्रिया

खान सर की ओर से उनके वकील ने कहा है कि फिलहाल पुलिस ने मामले को हत्या के रूप में नहीं माना है। ऐसे में उनके मुवक्किल की भूमिका पर सवाल उठाने का कोई आधार नहीं बनता। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियां उनसे संपर्क करती हैं तो वे पूरा सहयोग करेंगे।

अधिकारियों से मुलाकात जारी

रोशन आनंद इस मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों से भी मुलाकात कर रहे हैं। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि यदि पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो जल्द ही अदालत में याचिका दायर की जा सकती है। फिलहाल, मामला कानूनी राय और अधिकार क्षेत्र के सवालों के बीच उलझा हुआ है, जबकि सभी पक्ष आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।

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