कानपुर: सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू-गुटखा खाने व सिगरेट पीने पर भरना पड़ेगा जुर्माना, जिलाधिकारी ने जारी किए निर्देश
कानपुर, 5 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में अब सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू, गुटखा खाने और सिगरेट पीने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत ऐसे कृत्यों पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम शहर को स्वच्छ और तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में उठाया गया है, ताकि जन स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सके और लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
जिलाधिकारी के निर्देश
जिलाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क, सड़कें, सरकारी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इन स्थानों पर तंबाकू, गुटखा खाने या सिगरेट पीते पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह कार्रवाई सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 की धारा 4, 5 और 6 के तहत की जाएगी, जो सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों के उपयोग पर रोक लगाती है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी रखें और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। इसके लिए पुलिस, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें संयुक्त रूप से अभियान चलाएंगी। साथ ही, लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्थानों पर बोर्ड और पोस्टर भी लगाए जाएंगे, जिनमें तंबाकू के दुष्प्रभावों और जुर्माने की जानकारी दी जाएगी।
जुर्माने का प्रावधान
COTPA, 2003 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर 200 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, तंबाकू उत्पादों की बिक्री और उपयोग से संबंधित अन्य उल्लंघनों पर भी सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जिलाधिकारी ने कहा कि बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माने की राशि बढ़ाने के साथ-साथ कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं।

कानपुर में तंबाकू का चलन और चुनौती
कानपुर उत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक शहर है और यहां तंबाकू उत्पादों, खासकर गुटखा और पान मसाला का उत्पादन और खपत बड़े पैमाने पर होती है। यह शहर लंबे समय से इन उत्पादों के निर्माण का केंद्र रहा है, जिसके कारण यहां तंबाकू के सेवन की आदत आम है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए प्रशासन ने इस पर अंकुश लगाने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और गुटखा के सेवन से मुंह का कैंसर, हृदय रोग और श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं, जिसे रोकना जरूरी है।
जन जागरूकता पर जोर
जिलाधिकारी ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए जन जागरूकता को सबसे अहम बताया है। उन्होंने कहा कि केवल जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों को तंबाकू के नुकसान के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, स्थानीय संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं से भी सहयोग मांगा गया है, ताकि यह संदेश हर घर तक पहुंच सके।
पहले भी हो चुके हैं प्रयास
कानपुर को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में पहले भी कई प्रयास किए गए हैं। साल 2015 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के मौके पर जिला प्रशासन ने शहर को धूम्रपान मुक्त घोषित किया था। उस समय भी COTPA के नियमों को सख्ती से लागू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन समय के साथ यह अभियान कमजोर पड़ गया। अब जिलाधिकारी के नए निर्देशों के साथ इस पहल को फिर से मजबूती देने की तैयारी है।
लोगों की प्रतिक्रिया
शहर के निवासियों ने इस फैसले का मिला-जुला स्वागत किया है। कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम जन स्वास्थ्य के लिए जरूरी है और इससे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बढ़ेगी। वहीं, कुछ का कहना है कि तंबाकू उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। एक स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने कहा, “यह अच्छा कदम है, लेकिन सरकार को पहले लोगों को वैकल्पिक रोजगार देना चाहिए, ताकि उनकी जीविका न छिने।”