• January 20, 2026

पहलगाम हमले के बाद काशी में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों पर नजर, 10 में से 7 का विवाह और तलाक का मामला

वाराणसी, 24 अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। इनमें देश में मौजूद सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का अल्टीमेटम शामिल है। इस आदेश ने वाराणसी (काशी) में रह रहे 10 पाकिस्तानी नागरिकों को भी सुर्खियों में ला दिया है, जिनमें से सात का मामला भारतीय नागरिकों के साथ विवाह और तलाक से जुड़ा है। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, और इन नागरिकों की स्थिति की जांच शुरू हो गई है।
पहलगाम हमले और भारत का कड़ा रुख
पहलगाम के बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF), लश्कर-ए-तैयबा का एक सहयोगी संगठन, ने ली थी। हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक मारे गए। इसके जवाब में, भारत ने 23 अप्रैल को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक के बाद पांच बड़े कदमों की घोषणा की, जिनमें शामिल हैं:
  • इंडस वाटर ट्रीटी का निलंबन
  • अटारी-वाघा सीमा बंद
  • पाकिस्तानी राजनयिकों का निष्कासन और दोनों देशों के उच्चायोगों में कर्मचारियों की संख्या में कटौती।
  • SAARC वीजा छूट योजना रद्द और भारत में मौजूद सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश।
  • आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई

इन कदमों ने देश भर में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और वाराणसी में इन 10 नागरिकों का मामला विशेष रूप से चर्चा में है।
काशी में 10 पाकिस्तानी नागरिक
वाराणसी पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अनुसार, काशी में 10 पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं, जिनमें से सात का मामला भारतीय नागरिकों के साथ विवाह और तलाक से जुड़ा है। इनमें से अधिकांश महिलाएं हैं, जो वैध वीजा के जरिए भारत आई थीं, लेकिन विवाह या तलाक के बाद यहीं रह रही हैं। कुछ प्रमुख बिंदु:
  • विवाह और तलाक के मामले: सात पाकिस्तानी नागरिकों में से अधिकांश ने भारतीय पुरुषों से शादी की थी। इनमें से कुछ का तलाक हो चुका है, लेकिन वे भारत में ही रहीं। कुछ मामलों में, ये महिलाएं अपने बच्चों के साथ रह रही हैं, जो भारतीय नागरिक हैं।
  • वीजा स्थिति: इनमें से कुछ के वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी है, जबकि कुछ ने लंबी अवधि के वीजा या नागरिकता के लिए आवेदन किया है। हालांकि, पहलगाम हमले के बाद सभी पाकिस्तानी वीजा रद्द कर दिए गए हैं, जिससे इनकी स्थिति अनिश्चित हो गई है।

  • स्थानीय एकीकरण: ये नागरिक वाराणसी के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे भेलूपुर, सिगरा, और दशाश्वमेध, में रह रहे हैं। कुछ स्थानीय समुदाय में घुल-मिल गए हैं और छोटे-मोटे व्यवसाय या नौकरी कर रहे हैं।
  • पहचान और निगरानी: स्थानीय पुलिस ने इन 10 नागरिकों की पहचान कर ली है और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। खुफिया एजेंसियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि इनमें से कोई भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल न हो।
सीमा हैदर जैसा मामला?
इस स्थिति ने सीमा हैदर के मामले की याद दिला दी है, जो पाकिस्तान से अवैध रूप से भारत आई थीं और ग्रेटर नोएडा में अपने भारतीय पति सचिन मीणा के साथ रह रही हैं। सीमा का मामला भी विवाह और बच्चों से जुड़ा है, और उनका नागरिकता का आवेदन कोर्ट में विचाराधीन है। काशी के इन सात नागरिकों में से कुछ की स्थिति सीमा से मिलती-जुलती है, क्योंकि उनके बच्चे भारतीय नागरिक हैं और वे स्थानीय समुदाय में एकीकृत हो चुके हैं।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पहलगाम हमले के बाद सरकार का रुख सख्त है, और सभी पाकिस्तानी नागरिकों पर 48 घंटे का अल्टीमेटम लागू हो सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट के वकील अबू बकर सब्बाक ने कहा, “नियम सभी के लिए समान हैं। अगर वीजा रद्द हो चुके हैं, तो इन नागरिकों को भारत छोड़ना होगा, भले ही उनका विवाह या तलाक का मामला हो।” फिर भी, कुछ मामलों में कोर्ट या गृह मंत्रालय विशेष छूट दे सकता है, खासकर जहां बच्चे भारतीय नागरिक हों।
स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई
वाराणसी के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि इन 10 पाकिस्तानी नागरिकों की सूची तैयार कर ली गई है, और उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, “केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अभी हम उनकी वीजा स्थिति और कानूनी आधार की जांच कर रहे हैं।”
खुफिया एजेंसियां इन नागरिकों के बैकग्राउंड की भी जांच कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित हो कि वे किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल नहीं हैं। स्थानीय निवासियों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
सामाजिक और कानूनी जटिलताएं
इन 10 नागरिकों, खासकर सात विवाह और तलाक से जुड़े मामलों ने सामाजिक और कानूनी जटिलताएं पैदा कर दी हैं:
  • बच्चों की नागरिकता: जिन मामलों में बच्चे भारतीय नागरिक हैं, वहां निर्वासन का फैसला जटिल हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक पाकिस्तानी महिला, जिसका तलाक हो चुका है और जिसके दो बच्चे भारतीय स्कूलों में पढ़ रहे हैं, ने स्थानीय प्रशासन से विशेष छूट की मांग की है।
  • स्थानीय समुदाय का दबाव: कुछ स्थानीय संगठनों ने इन नागरिकों के निर्वासन की मांग की है, जबकि कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि व्यक्तिगत मामलों पर मानवीय आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
  • सुरक्षा चिंताएं: पहलगाम हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी संभावित जोखिम को टाला नहीं जाएगा।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान ने हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे “घरेलू हिंसा” करार दिया और कहा कि इसका पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने भारत के कदमों को “उकसावे वाला” बताया और चेतावनी दी कि पाकिस्तान जवाब देगा।

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