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मदरसों में छात्राओं ने भी किया योग, दशाश्वमेध घाट के सामने जलयोग

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बुधवार को हर घर आंगन योग थीम पर मदरसों में भी विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और प्रबंधन से जुड़े लोगों ने उत्साह के साथ योग किया। मदरसा दायरतुल इस्लाह चिरागे उलूम, रसूलपुरा में प्रबंधक रिजवान अहमद व प्रधानाचार्य महफूजुर्रहमान के साथ छात्राओं ने भी योग किया।

इस दौरान प्रबंधक रिजवान अहमद ने कहा कि अन्तराष्ट्रीय योग दिवस इस बार दुनिया भर में हर वर्ष की तुलना में काफी उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। अधिक से अधिक लोग योग के महत्व को समझ रहे हैं और इसे अपने जीवन में उतार रहे है। यहां कार्यक्रम में शामिल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के शुभम कुमार सेठ ने कहा कि विद्यार्थी परिषद छात्रहित के साथ ही समाज हित व देश हित के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेता है। परिषद में भी योगाभ्यास को प्रमुख स्थान दिया गया है।

योग मन, शरीर और आत्मा की एकता को सक्षम बनाने का एक मुख्य जरिया है। योगाभ्यास के विभिन्न रूपों से हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को अलग अलग तरीकों से लाभ मिलता है। विश्व योग दिवस पर जिले में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, गंगा घाटों, स्कूलों, पार्कों, स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों ने योगाभ्यास किया। गंगा के 30 घाटों पर 500-500 लोगों ने योग किया।

—विश्व योग दिवस पर दशाश्वमेध घाट के सामने जलयोग

गंगा की अविरलता-निर्मलता और घाट किनारे स्वच्छता के संकल्प को साकार करने के लिए नमामि गंगे टीम ने विश्व योग दिवस पर बुधवार को दशाश्वमेध घाट के सामने जलयोग किया। गंगा में जलयोग के दौरान पद्मासन, अनुलोम विलोम , सूर्य नमस्कार जैसे जल में किए जाने वाले तमाम योग क्रियाओं का प्रदर्शन कर कार्यकर्ताओं ने जल संरक्षण एवं विश्वकल्याण की कामना की। आम जनता से अपील की गई कि अब समय आ गया है कि हम लोग स्वच्छता को धर्म बनाएं । स्वच्छता को अपना संस्कार बनाएं और इन संस्कारों के जरिए हम स्वयं को पर्यावरण से जोड़ सकते हैं।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि जल के लिए जनाधार का उपयोग करके जलयोग करने की जरूरत है। जल योग सबसे बड़ा योग होने वाला है। यदि जल नहीं होगा तो न योग होगा, न ध्यान होगा और न ही कोई क्रिया होगी। इसलिए जल को सुरक्षित और संरक्षित रखना नितांत आवश्यक है। आने वाले समय में जो समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, उसके लिए जल शक्ति को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि योगमय जीवन पद्धति ने समूचे विश्व को एक परिवार की तरह जोड़ कर रखा है।

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