पटना, 31 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले NDA ने अपना ‘संकल्प पत्र’ जारी कर विकास, रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, CM नीतीश कुमार, चिराग पासवान और अन्य नेताओं ने पटना में इसे लॉन्च किया। घोषणापत्र में 1 करोड़ नौकरियां, महिलाओं को 2 लाख तक सहायता, किसानों को 9,000 रुपये सालाना और ‘पंचामृत गारंटी’ जैसे वादे हैं। लेकिन क्या ये वादे महागठबंधन को चुनौती देंगे? आइए, तीन […]Read More
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अमेरिका को झटका: शी जिनपिंग ने ट्रंप के ‘शांति डील’
बुसान, 31 अक्टूबर 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एशिया दौरे के दौरान दक्षिण कोरिया के बुसान में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई मुलाकात ने अमेरिका को झटका दिया। ट्रंप ने थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद में ‘शांति डील’ का श्रेय लेने का दावा किया था, लेकिन शी ने इसे खारिज कर चीन की भूमिका पर जोर दिया। यह घटना US-चीन प्रतिस्पर्धा को उजागर करती है। आखिर क्या था पूरा मामला? आइए, तीन हिस्सों में […]Read More
पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति वार्ता: इस्तांबुल में सीजफायर पर सहमति, 6 नवंबर
इस्लामाबाद, 31 अक्टूबर 2025: पाकिस्तान और अफगानिस्तान (तालिबान सरकार) के बीच सीमा तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक मोड़ आया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि इस्तांबुल में मध्यस्थता वाली वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने अस्थायी सीजफायर बनाए रखने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, लंबे समय की शांति के लिए 6 नवंबर को उच्च-स्तरीय बैठक होगी। यह फैसला 25-30 अक्टूबर की चार दिवसीय बातचीत के बाद आया, जो पहले विफल […]Read More
जेरूसलम, 31 अक्टूबर 2025: इजरायल-हमास संघर्ष विराम के बीच हमास ने गाजा में रेड क्रॉस को दो ताबूत सौंपे, जिनमें मृत बंधकों के अवशेष बताए जा रहे हैं। यह कदम शांति वार्ता की मुख्य शर्त का हिस्सा है, लेकिन हमास के पिछले धोखे से इजरायल भड़क चुका था। अब 13 और अवशेष लौटाने बाकी हैं। लेकिन क्या यह संघर्ष विराम को स्थायी बनाएगा? आइए, तीन हिस्सों में इस घटना को समझते हैं। हमास का कदम […]Read More
रूस-यूक्रेन युद्ध: पुतिन ने पत्रकारों को ‘सुरक्षित रास्ता’ देने का
मॉस्को, 31 अक्टूबर 2025: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाया। उन्होंने रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि विदेशी और यूक्रेनी पत्रकारों को क्रास्नोअर्मेस्क, दिमित्रोव और कुप्यांस्क जैसे घिरे इलाकों में सुरक्षित पहुंच दी जाए, जहां रूसी सेना ने यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया है। यह फैसला रूसी दावों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने साबित करने का प्रयास लगता है। लेकिन क्या यह प्रोपेगैंडा का नया हथियार है? आइए, […]Read More






